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राफेल सौदे के गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक खुलासे से देश के अस्तित्व पर खतरा....केंद्र सरकार ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
Posted by : achhiduniya
04 May 2019
सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे के गोपनीय दस्तावजों के परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की
तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त
सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है। राफेल डील को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। हलफनामे में केंद्र
सरकार ने कहा कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से
देश के अस्तित्व पर खतरा है। हलफनामे में सरकार ने कहा कि राफेल पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती- फिरती
जांच की कोशिश की गई। मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार
का अंतिम फैसला। ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं।
केंद्र ने कहा कि ये सिर्फ अधिकारियों के विचार हैं जिनके आधार पर सरकार कोई फैसला कर सके। सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी। CAG ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और कहा है कि यह 2.86% कम है। केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट जो भी मांगेगा सरकार राफेल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि वो द हिंदू में छपे रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों पर भरोसा कर उनके आधार पर सुनवाई करेगा।
केंद्र ने कहा कि ये सिर्फ अधिकारियों के विचार हैं जिनके आधार पर सरकार कोई फैसला कर सके। सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी। CAG ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और कहा है कि यह 2.86% कम है। केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट जो भी मांगेगा सरकार राफेल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं हैं, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि वो द हिंदू में छपे रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों पर भरोसा कर उनके आधार पर सुनवाई करेगा।
ये
याचिकाएं यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी और प्रशांत भूषण के अलावा मनोहर
लाल शर्मा, विनीत ढांडा और आप सासंद संजय सिंह ने
दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की
बेंच ने केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति को खारिज कर दिया था कि ये दस्तावेज
विशेषाधिकार प्राप्त हैं और कोर्ट इन्हें नहीं देख सकती।


