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- एग्रीकल्चर सेक्टर में गिरावट और आर्थिक धीमेपन की वजह से पाकिस्तान में छाए कंगाली के बादल....
Posted by : achhiduniya
14 May 2019
पाकिस्तान नेशनल अकाउंट कमेटी की ओर से जारी आंकड़ों में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में आई बड़ी गिरावट और आर्थिक धीमेपन का असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। वहीं, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान के हालात बदलेंगे या नहीं ये कहना मुश्किल है। इस बार IMF ने कड़े मापदंड के साथ पाकिस्तान की मदद की है। यह 22वीं बार है जब पाकिस्तान के हालात इतने बदतर हो गए की उन्हें IMF की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ा।
पाकिस्तान की जीडीपी विकास दर 3.3 प्रतिशत रह सकती है। जबकि 2018-19 के लिए उसका
विकास लक्ष्य 6.2 प्रतिशत था। पाकिस्तान को अगले बजट में बिजली और गैस की कीमत
में बढ़ोतरी करने की शर्त भी माननी पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को सब्सिडी घटानी होगी और केवल ऊर्जा
क्षेत्र के ही उपभोक्ताओं से 340 अरब रुपए वसूलने पड़ेंगे। पाकिस्तान की नियामक
संस्था नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेग्युलेटरी अथॉरिटी (NEPRA) को स्वायत्त संस्था बना दिया जाएगा और इसके
अहम फैसलों में पाकिस्तान की सरकार की भूमिका को सीमित कर दिया जाएगा। आईएमएफ की
शर्तों के तहत अब पाकिस्तान को 700 अरब तक का अतिरिक्त कर जुटाने, बिजली टैरिफ बढ़ाने जैसे मुश्किल कदम उठाने
पड़ेंगे।
एक आधिकारिक सूत्र ने अखबार से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के
अधिकारियों ने IMF डील फाइनल कराने के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय
शक्तियों यूएस और चीन से सिफारिश लगाई। IMF ने पाकिस्तान
को पैकेज देने के साथ ही उसके सामने कड़ी शर्तें और बेहद मुश्किल लक्ष्य रखे हैं।
वर्ष 2019-20 में पेश किया जाने वाला अगला वित्तीय बजट पाकिस्तानी अधिकारियों की
वित्तीय रणनीति की पहली अग्निपरीक्षा होगी। IMF डील अब तक की
सबसे कड़ी शर्तों के साथ की गई है और अगर पाकिस्तान संस्था की शर्तों को पूरा करने
में कामयाब नहीं हो पाता है तो वह संस्था की विश्वसनीयता की सूची में एक-दो पायदान
और नीचे गिर सकता है।


