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- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ के NCP सुप्रीमो शरद शरद पवार [चाचा] के आरोपो का खंडन किया [भतीजे] अजित पवार ने....
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ के NCP सुप्रीमो शरद शरद पवार [चाचा] के आरोपो का खंडन किया [भतीजे] अजित पवार ने....
Posted by : achhiduniya
15 May 2019
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [एनसीपी] प्रमुख शरद
पवार उन प्रमुख विपक्षी नेताओं में से हैं, जो चुनावों में ईवीएम के उपयोग पर सवाल उठाते रहे हैं
और फिर से मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने का पक्ष लेते रहे हैं। पिछले हफ्ते भी
उन्होंने ईवीएम को लेकर चिंता व्यक्त की थी,लेकिन उनके भतीजे अजित पवार का कहना है कि उन्हें ईवीएम
मशीन के कामकाज को लेकर कोई संदेह नहीं है। अजित पवार ने बीजेपी का नाम लिए बगैर
कहा कि अगर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ की जा सकती है तो वे पांच
राज्यों में चुनाव नहीं हारते। अजित पवार ने कहा,कई लोगों को ईवीएम पर संदेह है।
उन्हें लगता है कि इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है, जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा, मुझे ऐसा नहीं लगता है, लेकिन ये लोग ऐसा कहते रहते हैं। अगर ऐसा होता, तो वे (बीजेपी) पांच राज्यों में चुनाव नहीं हारते। यह पहली बार नहीं है। जब उन्होंने ईवीएम का बचाव किया है। पिछले साल 30 अक्टूबर को नागपुर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, अजित पवार ने कहा था कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इन मशीनों पर भरोसा है। बता दें पिछले साल नवंबर और दिसंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव हुए थे। बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवा दी थी और अन्य दो राज्यों में भी अपनी छाप छोड़ने में असफल रही।
उन्हें लगता है कि इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है, जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा, मुझे ऐसा नहीं लगता है, लेकिन ये लोग ऐसा कहते रहते हैं। अगर ऐसा होता, तो वे (बीजेपी) पांच राज्यों में चुनाव नहीं हारते। यह पहली बार नहीं है। जब उन्होंने ईवीएम का बचाव किया है। पिछले साल 30 अक्टूबर को नागपुर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, अजित पवार ने कहा था कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इन मशीनों पर भरोसा है। बता दें पिछले साल नवंबर और दिसंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव हुए थे। बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवा दी थी और अन्य दो राज्यों में भी अपनी छाप छोड़ने में असफल रही।

