- Back to Home »
- Religion / Social »
- ईद के दिन यह रीत बनाकर गले मिलना बिदअत यानि गलत है.... इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम
Posted by : achhiduniya
04 June 2019
आधुनिक दौर में ईद के त्यौहार पर एक दूसरे से गले मिलकर बधाई देने
का चलन बढ़ता ही जा रहा है। ईद से पहले सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, फतवा चर्चा का विषय बन रहा है। दारुल उलूम के फतवे
का उलेमा ने भी समर्थन किया है। इस चलन पर पाकिस्तान से दारुल उलूम देवबंद के
इफ्ता विभाग से लिखित सवाल कर पूछा गया कि क्या शरई एतबार से गले मिलकर एक दूसरे
को मुबारकबाद देना सही है या नहीं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल इस फतवे में
दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम ने दो टूक कहा है कि है कि खास ईद के दिन यह रीत बनाकर गले मिलना बिदअत है। माह-ए-रमजान में
पाकिस्तान से एक बार फिर दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम से सवाल किया गया है कि क्या
ईद के दिन परंपरा के रूप में एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई दी जा सकती है
साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या पैगंबर मोहम्मद और उनके साहबा ए कराम से कही यह साबित है। वहीं, अगला सवाल ये था कि अगर कोई हमसे गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो क्या हमें गले मिल लेना चाहिए। सवाल का जवाब देते हुए दारुल उलूम की खंडपीठ ने कहा है कि खास ईद के दिन एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई देना, कहीं साबित नहीं होता है। बकायदा ईद के दिन कहीं यह बनाकर गले मिला जाए तो यह है बिदअत में शामिल होगा। मुफ्ती-ए-कराम ने यह भी कहा है कि अगर किसी से बहुत दिनों के बाद मुलाकात हो तो फितरतन गले मिलकर बधाई देने में कोई गुरेज नहीं है।
साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या पैगंबर मोहम्मद और उनके साहबा ए कराम से कही यह साबित है। वहीं, अगला सवाल ये था कि अगर कोई हमसे गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो क्या हमें गले मिल लेना चाहिए। सवाल का जवाब देते हुए दारुल उलूम की खंडपीठ ने कहा है कि खास ईद के दिन एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई देना, कहीं साबित नहीं होता है। बकायदा ईद के दिन कहीं यह बनाकर गले मिला जाए तो यह है बिदअत में शामिल होगा। मुफ्ती-ए-कराम ने यह भी कहा है कि अगर किसी से बहुत दिनों के बाद मुलाकात हो तो फितरतन गले मिलकर बधाई देने में कोई गुरेज नहीं है।
उन्होंने
कहा है कि परंपरा के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसलिए बेहतर यही होगा कि
अगर कोई गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो उसे प्यार से समझाते हुए मना कर देना चाहिए, जिससे झगड़े की सूरत ना बने। देवबंदी उलेमा मौलाना
कारी साहब गोरा ने दारूल उलूम के फतवे का समर्थन किया है और समर्थन करते हुए कहा
है कि मोहम्मद साहब की जिंदगी से यह कहीं साबित नहीं होता कि खास ईद के दिन गले
मिलना चाहिए। इसलिए तमाम मुसलमानों को इससे बचना चाहिए,क्योंकि दींन के लिए एक नई बात पैदा होना यब बिदअत
है। हम देवबन्दी उलेमा दारूल उलूम के इस फतवे का समर्थन करते है।


