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- जाने बच्चे को दूध पिलाने का सही तरीका बचाए बच्चे की जान...
Posted by : achhiduniya
20 July 2019
हम सभी जानते हैं कि नाक, मुंह और गला
आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में जब कोई खाता या पीता है तो गले में खाना जाते ही
सांस की नली के खाने की नली से जुड़ाव की जगह अपने आप बंद हो जाती है। ताकि खाना
उसमें न चली जाए,लेकिन बच्चों में यह स्थिति कभी-कभी
मुश्किल हो सकती है। वह भी उस परिस्थिति में इस प्रक्रिया में समस्या आने की
ज्यादा संभावना रहती है,जब बच्चा बीमार हो। बच्चों में खुद से डकार
लेने की क्षमता नहीं होती। इसलिए कई बार डॉक्टर महिलाओं को बच्चों को डकार दिलवाने
के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्हें दूध पिलाने के बाद बच्चे को सीधा खड़ा करके बच्चे
के सिर को अपने कंधे पर रखना चाहिए ताकि सांस की नली में दूध जाकर सांस को न रोके।
इसके बाद मां को बच्चे की पीठ को तब तक थपथपाना चाहिए जब तक बच्चा डकार न ले।
मांओं को यह सलाह भी दी जाती है कि वे बच्चों को दूध पिलाते हुए सीधा रखें।
हालांकि बड़ों की सांस की नली में भी खाना या पेय पदार्थ फंस सकता है। ऐसा तब होता
है जब उन्हें निमोनिया जैसा कोई इंफेक्शन हुआ हो। इससे सही से खाने को निगल पाने की
क्षमता पर असर पड़ता है। हालांकि जब ऐसा होता है तो हल्की खांसी आती है,लेकिन अगर मामला सीरियस होता है तो इसके बुरे असर
हो सकते हैं।
कई बार अपनी ही लार सोते वक्त सांस की नली में फंस जाती है। हालांकि सोते में भी खांसी आ जाती है,जिससे सांस का रास्ता साफ हो जाता है,लेकिन अगर दूध पिलाते हुए ज्यादा मात्रा में दूध
गलत नली में चला जाए तो सांस रुकने से मौत के संभावना बहुत बढ़ जाती है। जब गलती
से खाना या कोई पेय पदार्थ खाने की नली की बजाए सांस की नली में फंस जाता है।
अगर
इंसान बड़ा हो तब तो वह खांसने लगता है जिससे उसका खाना निकल जाता है,लेकिन अगर खाना इस तरह से फंस जाए कि पूरी तरह से
सांस आनी बंद हो जाए तो इससे इंसान की मौत भी हो सकती है। जैसा की बच्चे के मामले
में हुआ। बल्कि बच्चों में ऐसी दुर्घटना की संभावना ज्यादा होती है। हालांकि दूसरी
बीमारियों के मुकाबले इस कारण से मरने वाले बच्चों की संख्या काफी कम है,लेकिन यह कोई बीमारी नहीं है और इससे आसानी से
बच्चे को बचाया जा सकता है।



