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फैमिली प्लानिंग जरूरी, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने देश की बढ़ती आबादी पर की फिक्र जाहिर..मुस्लिम उलेमा ने किया समर्थन
Posted by : achhiduniya
15 August 2019
भारत दुनिया में चीन के बाद
दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला मुल्क है और अंदेशा है कि 2025 तक इसकी आबादी
चीन से ज़्यादा हो जाएगी। डेमोग्राफर आबादी बढ़ने की कई वजहें मानते हैं। मिसाल के
लिए-गरीबी में आदमी ज़्यादा कमाने के लिए ज़्यादा बच्चे चाहता है। लड़की को बोझ
समझकर जल्दी शादी की जाती है। अगर 18 के बजाय 28 साल की उम्र में लड़की की शादी हो
तो बच्चों का जन्म 10 साल टाला जा सकता है। बेटे की चाह में तमाम लोग तब तक बच्चे
पैदा करते रहते हैं जब तक बेटा न हो जाए। गैर कानूनी माइग्रेशन हो रहा है।
बांग्लादेश और नेपाल से आकर भारत में बसने
वाले भी आबादी बढ़ाते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी की जनसंख्या
नियंत्रण की अपील का तमाम मुस्लिम उलेमा ने स्वागत किया है।
उनका कहना है कि
फैमिली प्लानिंग जरूरी है। जनसंख्या बढ़ने के सामाजिक आर्थिक कारण हैं, इसका धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है। इस्लाम
धर्मशास्त्र के कई विद्वानों का कहना है कि कुरान में फैमिली प्लानिंग का कहीं भी
विरोध नहीं किया गया। ऐसा कहने वाले या तो
नासमझ हैं या उनका मकसद कुछ और है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने देश
की बढ़ती आबादी पर भी फिक्र जाहिर की। शायद इस सियासी प्रचार की वजह से कि मुसलमान
परिवार ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, कई उलेमा ने
फौरन पीएम की हिमायत की। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली
ने कहा कि प्राइम मिनिस्टर साहब ने आज यौमे आज़ादी के मौके पर जो पॉपुलेशन वाली
बात कही है वह बहुत कीमती और बहुत अहम बात है और हम यह समझते हैं कि जैसे-जैसे
मुल्क में एजुकेशन बढ़ेगा, वैसे-वैसे इंशा अल्लाह पॉपुलेशन पर रोक
लगाई जा सकेगी।
देश में मुस्लिम आबादी करीब 14 फीसदी है,लेकिन उनके फैमिली प्लानिंग न अपनाने का प्रचार
ज्यादा है। मुस्लिम विद्वान कहते हैं कि कुरान में कहीं फैमिली प्लानिंग का विरोध
नहीं है। करीब 1500 साल पहले अरेबियन पेनिन्सुला में आबादी की
कोई समस्या नहीं थी और तब परिवार नियोजन के आधुनिक उपाय भी नहीं थे। जनसंख्या
विस्फोट इस देश की बहुत बड़ी समस्या है,लेकिन यह एक
सामाजिक समस्या है जिसका न किसी धर्म से कोई संबंध है और न ही राजनीति से लेकिन यह
हल इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि इसके बीच में राजनीति आ जाती है और जब राजनीति
आती है तो अपने साथ धर्म भी लेकर आती है।


