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- UNSC की Close-Door Meeting ने पाकिस्तान को किया बाहर....
Posted by : achhiduniya
16 August 2019
आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में क्लोज-डोर मीटिंग बहुत कम ही होती हैं। ये मीटिंग जब भी होती है, तो इसे असाधारण ही माना जाता है। पिछली बार ऐसी मीटिंग 2015 में यमन में अप्रत्याशित हिंसा को लेकर दो बार जल्दी-जल्दी हुई थी। उसके बाद अब कश्मीर मामले पर ऐसा होने जा रहा है। क्लोज डोर का अगर अर्थ समझें तो कैंब्रिज डिक्शनरी कहती है, ऐसी मीटिंग जिसमें हर कोई आमंत्रित नहीं होता और ना ही ये पब्लिक के लिए होती है। अगर इसे संयुक्त राष्ट्र के हिसाब से समझा जाए तो मतलब है ऐसी मीटिंग जिसमें खास लोग ही शिरकत करेंगे। यहां पर खास लोगों से मतलब सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और दो साल के कार्यकाल वाले अस्थायी सदस्य। यानी संयुक्त राष्ट्र के सभी देश इस मीटिंग में नहीं होंगे। पाकिस्तान ने पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) को एक पत्र लिखकर कश्मीर में भारतीय सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इस पर मीटिंग बुलाने की मांग की।
पाकिस्तान की इस आपत्ति पर उसके दोस्त माने जाने वाले चीन ने कहा, ये मीटिंग क्लोज-डोर (Close-Door Meeting) होनी चाहिए यानी गुप्त मीटिंग,लेकिन इस मीटिंग में शिकायत करने वाले पाकिस्तान
को ही प्रवेश नहीं मिलेगा। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में जब भी क्लोज डोर
मीटिंग होती है जब इसमें इन्हीं दो तरह के सदस्यों की भूमिका होती है। इस मीटिंग की अध्यक्षता सुरक्षा परिषद का
अध्यक्ष देश करता है। ये अध्यक्ष देश स्थायी और अस्थायी देशों के बीच से चुना जाता
है। वो ये तय करता है कि ऐसी मीटिंग की जरूरत है या नहीं। इस समय अस्थायी सदस्य
पोलैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। ये मीटिंग उसी के जरिए बुलाई
गई है। इस मीटिंग के जरिए पाकिस्तान की कोशिश भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने
की होगी।
उसे लगता है कि चीन मीटिंग में उसका पक्ष रखेगा, लेकिन
ये भी संभव है कि अगर अमेरिका ने अपना प्रभाव दिखाया तो ज्यादातर इस मामले पर
पाकिस्तान के साथ जाने की बजाए यही कहेंगे कि इस मसले को भारत-पाकिस्तान खुद
बातचीत के जरिए सुलझाएं या ये भी हो सकता है कि इस मीटिंग का लब्बो लुआब ये निकले
कि ये भारत का इंटरनल मामला है। पाकिस्तान को मालुम है कि अगर भारत को अपना पक्ष
रखने का मौका मिला तो वहां पर पाकिस्तान के तर्क हल्के पड़ जाएंगे। भारत को पूरा
हक है कि उसके पास जो कश्मीर है, उसमें वो अपने
संविधान के दायरे में कदम उठा सकता है। उसी
के तरह भारत ने आर्टिकल 370 में बदलाव किया है। लिहाजा भारत के नहीं रहने पर चीन
ये जिम्मा संभालेगा कि पाकिस्तान का पक्ष मजबूत तरीके से रखे और सुरक्षा परिषद में
भारत के खिलाफ माहौल बनाए।


