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दुर्भाग्यपूर्ण है कि 70 साल बीतने के बाद भी देश में जातिगत भेदभाव जारी,सरकारें उनको प्रोटेक्ट करने में विफल....सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
18 September 2019
सुप्रीम कोर्ट ने कहा सीवर सफाईकर्मी हर रोज मर रहे हैं और
उन्हें कोई सुरक्षा प्रदान नहीं किया जा रहा हैं और इसके बावजूद संबंधित
अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जो सफाई कर्मियों को सुरक्षा
प्रदान करने में लापरवाही बरतते हैं। पीठ ने पूछा,मैनुअल
स्कैवेंजिंग के लिए आपने क्या किया है? किसी भी अन्य
देश में लोग बिना सुरक्षात्मक यंत्र के मैनहोल में प्रवेश नहीं करते हैं। SC/ST एक्ट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजादी को 70 साल बीत चुके
हैं, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में अभी
भी जातिगत भेदभाव जारी है और सरकारें उनको प्रोटेक्ट करने में विफल रही हैं।
जातिगत
भेदभाव अभी भी समाज में जारी है और मैनहोल, नालियों अन्य
स्थानों पर सफाई करने वाले लोग मास्क ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं पहनने के कारण मर रहे
हैं। आपने इसके बारे में क्या किया है? कोर्ट ने कहा
कि इस देश में छूआछूत का अब भी चलन है क्योंकि कोई भी इस तरह की सफाई गतिविधियों
में शामिल लोगों के साथ नहीं रहना चाहता है। पीठ ने कहा कि स्थितियों में सुधार
किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सीवर की सफाई करने वाले व्यक्तियो को सुरक्षा
नहीं देने पर सरकारी एजेंसियों पर टिप्पणी की। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की
अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने सरकार की आलोचना की और कहा कि दुर्भाग्य
से जातिगत भेदभाव आजादी के 70 साल बीत जाने
के बावजूद समाज में व्याप्त है।
कोर्ट ने इसे सबसे असभ्य और अमानवीय स्थिति। ये
टिप्पणियां करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मिश्रा, एम आर शाह और बीआर गवई की बेंच ने केंद्र की
पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। पुनर्विचार याचिका में केन्द्र
ने 2018 के फैसले को वापस लेने की मांग की है, जिसमें एससी / एसटी अधिनियम के तहत दायर एक
शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी के कठोर प्रावधानों और आरोपियों के लिए कोई अग्रिम
जमानत नहीं दी थी।


