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- एक तरफ बाढ़ से हाहाकार दूसरी तरफ मराठवाड़ा के छह बांधों में पानी की भारी कमी....
Posted by : achhiduniya
04 October 2019
मराठवाड़ा में नौ बड़ी और 800 मध्यम व छोटी सिंचाई परियोजनाएं
चल रही हैं। सिंचाई विभाग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र की बड़ी परियोजनाएं पिछले साल के मुकाबले थोड़ी बेहतर
स्थिति में हैं। महाराष्ट्र के सिंचाई विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के
अनुसार सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र को जलापूर्ति करने वाले नौ में से छह बांधों
को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। बीड के मांजरा और माजलगांव बांध, हिंगोली स्थित सिद्धेश्वर बांध, उस्मानाबाद
के लोअर तरना और सिना कोलेगांव बांध और परभनी में लोअर दुधना बांध पर्याप्त बारिश
न होने के कारण पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं।
इन परियोजनाओं में पानी की
आपूर्ति गत वर्ष के 30.49 प्रतिशत
से बढ़कर इस वर्ष 56.47 प्रतिशत हो गई। इनमें आज कुल 3828.65 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी है। हालांकि मध्यम स्तर की
परियोजनाओं की स्थिति इतनी सुधरी हुई नहीं है। मराठवाड़ा में मध्यम स्तर की
परियोजनाओं में 317.19 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी है जो कि कुल क्षमता
का 21.06 प्रतिशत है। गत वर्ष यह आंकड़ा 24.25 प्रतिशत था। इसकी तुलना में 4473.44 मिलियन क्यूबिक मीटर भंडारण के साथ छोटी परियोजनाएं कुछ बेहतर
स्थिति में हैं। यह भंडारण कुल क्षमता का 40.89 प्रतिशत
है।
यह आंकड़ा एक वर्ष पहले 26.92 प्रतिशत
था। नौ में से छह बड़ी परियोजनाओं में जल भंडारण नगण्य है, जबकि औरंगाबाद में जयाकवाड़ी और नांदेड़ में लोअर मनार
परियोजनाएं पानी से लबालब हैं। जल भंडारण विशेषज्ञ प्रदीप पुरंदरे के अनुसार गन्ने
की सिंचाई के लिए जल के अत्यधिक प्रयोग के कारण पानी का संकट होता है, किंतु इस वर्ष परियोजनाओं में जल संकट का कारण वर्षा का कम होना
है।


