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- 40 दिनों तक नियमित सुनवाई के बाद आए अयोध्या श्री राम जन्मभूमि विवाद केस में ऐतिहासिक फैसले के महत्वपूर्ण पहलू ....
40 दिनों तक नियमित सुनवाई के बाद आए अयोध्या श्री राम जन्मभूमि विवाद केस में ऐतिहासिक फैसले के महत्वपूर्ण पहलू ....
Posted by : achhiduniya
09 November 2019
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इलाहाबाद हाई कोर्ट
ने अपने निर्णय में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का जो फैसला दिया वो
तार्किक नहीं था। कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की ये आस्था कि श्रीराम का जन्म अयोध्या
में हुआ है,
इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। कोर्ट ने कहा
कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था। अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं
का अधिकार साबित होता है। 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं हैं। सीता
रसोई की भी पूजा अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या
केस
में ऐतिहासिक फैसला सर्वसम्मति यानी 5-0 से
सुनाया है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने
फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा। विवादित जमीन रामलला को
दी जाएगी। मुस्लिम पक्ष अपने साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाए कि विवादित भूमि
पर उनका ही एकाधिकार था। मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में किसी अन्य जगह मस्जिद
निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन के बंटवारा
का आदेश गलत था। पुरातत्व विभाग (ASI) की
रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। ASI की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता।
खुदाई में इस्लामिक
ढांचे के सबूत नहीं मिले। अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा हिंदू करते
थे। कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस ने कहा कि मीर
बाकी ने बाबर के वक्त बाबरी मस्जिद बनवाई थी। 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं। बाबरी
मस्जिद को गैर-इस्लामिक ढांचे पर बनाया गया। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी
थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देवता न्यायिक व्यक्ति होता है। मूर्ति भी न्यायिक
व्यक्ति होती है। मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे। सुन्नी
वक्फ बोर्ड विवादित क्षेत्र पर अपना मालिकाना हक और प्रतिकूल कब्जा साबित करने में
नाकाम रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर एक स्कीम
बनाकर एक ट्रस्ट का गठन करेगी जो मंदिर बनवायेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
निर्मोही अखाड़े का सूट मेनटेबल नहीं है। यह सेवियत राइट के खिलाफ है। उन्हें शेबेट के अधिकार प्राप्त नहीं हैं। चीफ
जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इससे जुड़ी जो बाकी याचिकाएं हैं, वो खारिज की जाती हैं। CJI ने
रामलला के वकील के पराशरण और सी एस वैद्यनाथन, हरिशंकर
जैन की सराहना की।



