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मातोश्री से चलेगी महाराष्ट्र सरकार मिली कांग्रेस और एनसीपी की इजाजत,मुख्यमंत्री होंगे उद्धव ठाकरे....शरद पवार ने जताई इच्छा
Posted by : achhiduniya
22 November 2019
महाराष्ट्र विधान सभा चुनावो के बाद से राजनीति में खिंचतान के चलते बनते–बिगड़ते समीकरणों पर आज विराम लग गया। कांग्रेस और एनसीपी के बीच सरकार बनाने के लिए गठबंधन को लेकर मुंबई के नेहरु सेंटर में बैठक खत्म हो चुकी है। यहां शरद पवार, उद्धव ठाकरे सहित कांग्रेस कई अन्य नेता मौजूद रहे। बैठक से निकलकर शरद पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे होंगे। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद गठबंधन का ऐलान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक सीएम पद की रेस से उद्धव ठाकरे ने खुद को बाहर रखा है। सूत्रों के अनुसार एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत के नाम का प्रस्ताव रखा है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे का भी नाम सीएम पद की रेस में हैं। इससे पहले कांग्रेस कार्यसमिति ने विचार-विमर्श के बाद राज्य में शिवसेना के साथ हाथ मिलाने को अपनी स्वीकृति दे दी।
पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि शुक्रवार तक फैसला होने की उम्मीद है।
इसके बाद कांग्रेस-एनसीपी नेताओं की बैठक हुई। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री
पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया कि दोनों दलों में सभी मुद्दों पर सहमति बन गई है। अब
दोनों पार्टियां शुक्रवार को मुंबई में छोटे सहयोगी दलों और शिवसेना के साथ बातचीत
करेंगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मुंबई में ही नई सरकार के स्वरूप पर विचार
होगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस
सरकार गठन के लिए शुक्रवार देर रात या शनिवार सुबह दावा पेश करेंगे। मलिक ने यह भी
कहा कि तीन दल पांच साल सरकार चलाने को प्राथमिकता देंगे। इस बैठक के बारे में कहा जा रहा है कि
इसमें शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं।
बैठक में
शरद पवार, अहमद पटेल, उद्धव
ठाकरे, संजय राउत, केसी वेणुगोपाल, अजित पवार सहित कई नेता मौजूद हैं। शिवसेना के पास 56, एनसीपी के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। केंद्रीय
मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ये तीनों पार्टियां मिलकर राज्य में स्थिर सरकार
नहीं दे पाएंगी। इसके पीछे उन्होंने विचारधारा को वजह बताया। नितिन गडकरी ने कहा
कि इनकी विचारधारा अलग है। उन्होंने कहा
कि जिस विचारधारा पर कांग्रेस चलती है उसका शिवसेना विरोध करती है तो वहीं शिवसेना
की विचाधारा के विरोध में कांग्रेस है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया कि
इन तीनों पार्टियों का गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगा। उन्होंने कहा कि ये
अवसरवाद का गठबंधन है।


