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- JNU स्टूडेंट्स के उग्रप्रदर्शन के बाद प्रशासन ने फीस बड़ौतरी का फैसला लिया वापस....
Posted by : achhiduniya
13 November 2019
JNU
स्टूडेंट्स ने सोमवार को एआईसीटीए बिल्डिंग के
बाहर प्रदर्शन किया था जहां जेएनयू की दीक्षांत समारोह चल रहा था। उनके प्रदर्शन
के कारण मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक छह घंटे अंदर ही फंसे रह
गए। जेएनयू के स्टूडेंट्स का हॉस्टल फीस के खिलाफ बुधवार को भी सड़कों पर उतरे, जिसमें उन्हें लेफ्ट के अलावा राइट विंग की छात्र इकाई का भी
समर्थन प्राप्त हुआ। आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी भी छात्रों के समर्थन में आई और
इसके कार्यकर्ता यूजीसी बिल्डिंग के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए। ये स्टूडेंट्स
हॉस्टल मैनुअल के ड्राफ्ट को वापस लेने की मांग कर थे।
जिसके मुताबिक, उनके हॉस्टल रूम का किराया कई गुना बढ़ा दिया गया था। इसके
अतिरिक्त विजिटर्स के लिए रात 10:30 के बाद हॉस्टल से निकलने का प्रावधान था। वहीं, लड़कों के कमरे में किसी लड़की या फिर लड़की के कमरे में किसी
लड़के की एंट्री पर रोक लगाई गई थी। हॉस्टल के नियमों का पालन न करने पर 10,000
रुपये के फाइन का भी प्रस्ताव शामिल था। हॉस्टल फीस में वृद्धि के खिलाफ जेएनयू
स्टूडेंट्स के व्यापक प्रदर्शन के बाद आखिरकार प्रशासन ने इस फैसले को वापस ले
लिया। शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यन ने बताया कि एग्जिक्यूटिव कमिटी ने हॉस्टल फीस
में वृद्धि और अन्य नियमों से जुड़े फैसले को वापस ले लिया है।
उन्होंने
स्टूडेंट्स से अपील की है कि प्रदर्शन खत्म कर वापस क्लास का रुख करें। शिक्षा
सचिव ने बताया कि एग्जिक्यूटिव कमिटी की बैठक में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गे के
स्टूडेंट्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने से संबंधित योजना का प्रस्ताव भी पेश
किया गया। इन प्रदर्शनों से बाधा की आशंका को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने
एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक परिसर से बाहर बुलाई। एग्जिक्यूटिव काउंसिल जेएनयू
की सबसे बड़ी डिसिजन मेकिंग इकाई है। उधर, जेएनयू
के टीचर्स असोसिएशन का आरोप है कि एग्जिक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग का स्थान बदलने
की जानकारी उन्हें नहीं दी गई जो कि आईटीओ के पास असोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज
आयोजित की गई।
जेएनयूटीए अध्यक्ष डी के लोबियाल ने कहा कहा, हमारे कई मुद्दे हैं, हॉस्टल
मैनुअल के अलावा, शिक्षकों की पदोन्नति भी मुद्दा है। इसलिए हमारी
बात भी उठनी चाहिए। पिछले तीन-चार सालों से यहां तक कि अकैडमिक काउंसिल मीटिंग या
तो टाल दी जाती है या फिर दूसरे स्थान पर की जा रही है। हम इसकी निंदा करते हैं और
वीसी को इस तरह से यूनिवर्सिटी नहीं चलानी चाहिए।



