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- चौकने वाला खुलासा... केंद्रशासित प्रदेशों को निर्भया फंड के रूप में आवंटित 2,264 करोड़ रुपये का 25% भी सुरक्षा के लिए नही खर्च किया राज्य सरकारो ने....
चौकने वाला खुलासा... केंद्रशासित प्रदेशों को निर्भया फंड के रूप में आवंटित 2,264 करोड़ रुपये का 25% भी सुरक्षा के लिए नही खर्च किया राज्य सरकारो ने....
Posted by : achhiduniya
08 December 2019
महिला सुरक्षा के लेकर राज्य सरकारें कितनी
असन्वेदनशील और लापरवाह हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया
जा सकता है कि कोई भी राज्य केंद्र से आवंटित फंड के आधे हिस्से से ज्यादा खर्च
नहीं कर सका है। केंद्र सरकार महिला सुरक्षा के लिए निर्मित निर्भया फंड से
विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को 2,264
करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के
चिलड्रेंस फाउंडेशन के आंकड़े संसद को भेजे गए हैं। इन आकंड़ों के मुताबिक राज्यों
ने कुल आवंटित निर्भया फंड का
सिर्फ 11% हिस्सा ही खर्च किया। 29 नवंबर को लोकसभा
में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय और राज्यवार
विश्लेषण पेश किया था। आकलन की धीमी प्रक्रिया के कारण उपयोग प्रमाणपत्र से खर्च
किए गए धन की बिल्कुल सटीक जानकारी तो नहीं मिलती है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि प्रमाणपत्र में दिए गए आंकड़े से असल
आंकड़े बहुत ज्यादा होंगे। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2017 की
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र महिलाओं के खिलाफ
अपराध के मामले में देश में दूसरे जबकि बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में तीसरे
नंबर पर आता है।
हाल के दिनों में महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ जिन वारदातों ने देश
को हिला दिया,
वे कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, उत्तर प्रदेश में हुए। लेकिन, रिपोर्ट कहती है कि इन राज्यों ने कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा ने निर्भया फंड का सिर्फ 6% धन ही खर्च किया
जबकि उत्तर प्रदेश ने 21% हिस्से का इस्तेमाल किया। दिल्ली ने 95% निर्भया फंड नहीं किया इस्तेमालकुल 36 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में से 18 ने आवंटित रकम का 15% हिस्सा
ही खर्च किया है। निर्भया फंड के इस्तेमाल में उत्तराखंड और मिजोरम 50% के खर्च के साथ टॉप पर हैं।
उनके बाद छत्तीसगढ़ 43%, नागालैंड 39% और हरियाणा 32% खर्च के साथ क्रमशः तीसरे, चौथे और
पांचवें स्थान पर है। हैरत की बात है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधिक वारदातों से
देशभर में बदनाम हो चुकी दिल्ली में महज 5% धन का
ही उपयोग किया गया है।



