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- अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए सरकार उठाएगी यह कदम..
Posted by : achhiduniya
13 December 2019
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने खपत और निवेश को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदम के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय में सरकार के आर्थिक रिफॉर्म का क्या असर रहा है। केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए सरकार विनिवेश पर फोकस कर रही है। गैर-बैंकिंग वित्तिय कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को सपोर्ट करने के लिए सरकार ने 4.47 लाख करोड़ रुपये की मदद की है। उन्होंने आगे बताया कि RBI गाइडलाइन्स जारी किए जाने के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों को रेपो लिंक्ड प्रोडक्ट्स जारी किए हैं। नवंबर माह तक 70 हजार करोड़ रुपये के 8 लाख लोन जारी किए गए हैं।
सरकारी ने भरा PSU का बकाया-दो दिनों में ही सरकार ने 7,657 करोड़ रुपये के 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। साथ ही
सरकारी कंपनियों के 61,000 करोड़ रुपये के बकाये को
सरकार ने क्लियर कर दिया है। उन्होंने
बताया कि कॉरपोरेट टैक्स रेट में कटौती के बाद भारत वैश्विक स्तर पर अधिक
प्रतिस्पर्धी है। सरकार द्वारा किए गए रिफॉर्म्स की वजह से 2019 की पहली तिमाही
में एफडीआई इनफ्लो बढ़कर 35 अरब डॉलर के पार जा चुका है। सुब्रमण्यम ने कहा कि
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के नियम सख्त कर दिए गए हैं। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 5 नवंबर को FPI के लिए KYC नॉर्म्स में कई बदलाव किए हैं। RBI ने GIFT-IIFSC में
डॉलर-रुपए में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की इजाजत दे दी है। वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग
बिजनेस में भारत 63वें पायदान पर पहुंच गया है। सुब्रमण्यम कहा कि लेबर लॉ को 4
हिस्सों में बांट दिया गया है।
कोड ऑफ वेजेज 2019 को अगस्त 2019 में नोटिफाई कर
दिया गया है। कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ
एंड वर्किंग कंडिशंस बिल, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और
सोशल सिक्योरिटी कोड बिल को इस साल नोटिफाई किया गया है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने
कहा कि इकोनॉमिक को मजबूत करने वाले कई कदम उठाए गए हैं। 2017-18 में कैजुअल वर्कर
और फॉर्मल वर्कर्स की तादाद 5-5 फीसदी बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक इनकम
टैक्स रिफंड 1.57 लाख करोड़ रुपए का हुआ है। पिछले साल यह आंकड़ा 1.23 लाख करोड़
रुपए का था। इस फिस्कल ईयर में IGST 38,988 करोड़ रुपए का रहा है जो
पिछले फिस्कल ईयर में 56,057 करोड़ रुपए था।


