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- शिवसेना द्वारा नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन की वोटिंग से कांग्रेस आलाकमान नाराज
Posted by : achhiduniya
11 December 2019
नागरिकता बिल पर शिवसेना ने एक बार फिर अपना रुख
बदल लिया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर शिवसेना को संदेश दिया और महाराष्ट्र में
गठबंधन से बाहर आने की चेतवानी भी दी। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना का अगर यही
रुख कुछ मंत्रालय हमारे लिए अहमियत नहीं रखता। इसके बाद ही शिवसेना नेता संजय राउत
की तरफ़ से बयान आया कि कल जो लोकसभा में हुआ भूल जाइए, लेकिन देखना है कि राज्यसभा में शिवसेना क्या करती है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब तक चीजें
स्पष्ट नहीं हो जाती,हम समर्थन नहीं करेंगे। मीडिया
से बात करते हुए ठाकरे ने कहा,जब तक चीजें स्पष्ट नहीं हो
जाती, हम बिल का समर्थन नहीं करेंगे। अगर कोई भी नागरिक इस बिल की वजह
से डरा हुआ है तो उनके शक दूर होने चाहिए।
वे भी हमारे नागरिक हैं, इसलिए उनके सवालों के भी जवाब दिए जाने चाहिए। लोकसभा में बिल के पास होने से पहले शिवसेना ने
इसका विरोध किया था, फिर जब इस सदन में पेश किया
गया तो शिवसेना के सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया। कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन
विधेयक को असंवैधानिक एवं संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया और कहा कि इसमें न
केवल धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया है,बल्कि
यह सामाजिक परंपरा और अंतरराष्ट्रीय संधि के भी खिलाफ है। कांग्रेस के मनीष तिवारी
ने कहा,यह विधेयक असंवैधानिक है,संविधान
की मूल भावना के खिलाफ है। जिन आदर्शों को लेकर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने
संविधान की रचना की थी। यह उसके भी खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून में
आठ बार संशोधन किया गया है, लेकिन जितनी उत्तेजना इस बार
है,उतनी कभी नहीं थी। लोकसभा में बिल पेश होने से पहले शिवसेना के
मुखपत्र सामना में इसकी आलोचना करते हुए सवाल उठाए थे कि क्या हिंदू अवैध
शरणार्थियों की चुनिंदा स्वीकृति देश में धार्मिक युद्ध छेड़ने का काम नहीं करेगी
और उसने केंद्र पर विधेयक को लेकर हिंदुओं तथा मुस्लिमों का अदृश्य विभाजन करने का
आरोप लगाया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने यह भी कहा कि विधेयक की आड़
में वोट बैंक की राजनीति करना देश के हित में नहीं है।


