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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व वाले सैन्य मामलों के नव-सृजित विभाग में कई वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती होगी...
Posted by : achhiduniya
10 January 2020
भारतीय वायुसेना वायु रक्षा में एक प्रमुख भूमिका
निभाती है, लेकिन भारतीय सेना के पास अपनी
खुद की क्षेत्र वायु रक्षा प्रणाली है। वहीं भारतीय नौसेना के पास सबसे उन्नत और
गतिशील वायु रक्षा प्रणाली है। रावत ने 30 जून और 31 दिसंबर, 2020 तक तालमेल के लिए प्राथमिकताएं तय कीं। जनरल बिपिन रावत ने देश के
पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ [CDS ] के रूप में कार्यभार
संभालने के एक दिन बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान
उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए एयर डिफेंस कमांड स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार
करने का निर्देश दिया था। बैठक के दौरान उन्होंने प्रस्ताव के लिए एक समय सीमा भी
निर्धारित की थी। रक्षा मंत्रालय ने बताया, इस प्रस्ताव की
समय सीमा 30 जून, 2020 है। अब तक तीनों सेवाओं के बीच एक ही
वायु रक्षा कमान (एयर डिफेंस कमांड) है।
जनरल रावत की पहली प्राथमिकता भारत को
किसी भी हवाई हमले से सुरक्षित करने के लिए वायु रक्षा कमान का गठन करना है। चीफ ऑफ
डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व वाले सैन्य मामलों के नव-सृजित विभाग
में कई वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती होगी। सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस
डिपार्टमेंट में 2 संयुक्त सचिव, 13 उप सचिव और 22 अवर सचिव
होंगे। सीडीएस ने तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि सभी को
वांछित परिणामों को पूरा करने और बेहतर विचार एवं सुझाव के साथ काम करना चाहिए। सामान्य
कार्य प्रणाली पर जोर देते हुए सीडीएस रावत ने निर्देश दिया था कि सभी तीनों
सेनाओं और तटरक्षक से परामर्श किया जाना चाहिए और उनके विचारों को समयबद्ध तरीके
से प्राप्त किया जाना चाहिए।

