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- बढ़ती महंगाई की जिम्मेदार सरकार या देश में लगातार हो रहे प्रदर्शन, धरना और हड़ताल....?
Posted by : achhiduniya
14 January 2020
देश के व्यापारिक संगठनों के संघ फिक्की के
अनुसार अगर देश में एक दिन की हड़ताल या बंदी होती है। तो इससे देश को करीब 30 से
35 हजार करोड़ का नुकसान होता है। महंगाई से देश को फिलहाल आराम मिलता नजर नहीं आ
रहा है। खाने-पीने की चीजें महंगी होने से दिसंबर में खुदरा महंगाई दर में फिर
इजाफा हो गया है,लेकिन इसके पीछे की एक बड़ी वजह देश में लगातार
हो रहे प्रदर्शन, हड़ताल और धरना भी है। दिसंबर में खुदरा महंगाई
दर बढ़कर 7.35 फीसदी हो गई है।
जबकि नवंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54 फीसदी थी।
इसके अलावा खाद्य महंगाई दर में भी साल के आखिरी महीने में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, नवंबर में खाद्य महंगाई दर 10.01 फीसदी थी, जो दिसंबर में बढ़कर 14.12 फीसदी हो गई। आंकड़ों की मानें तो
प्याज, टमाटर और अन्य सब्जियों की कीमतों में इजाफा होने के कारण दिसंबर
में खुदरा महंगाई दर में उछाल देखने को मिला है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दामों
में भी बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है।
जिसका असर आम लोगों की जेब पर तो बढा
ही और वही असर बाजार में भी देखा जा रहा है। सब्जियों की महंगाई दर अक्टूबर में 26
फीसदी थी, फिर नवंबर में बढ़कर 36 फीसदी हो गई और अब दिसंबर में बेतहाशा
बढ़ोतरी देखी गई है। दिसंबर में सब्जियों की महंगाई दर बदकर 60.5 फीसदी हो गई। कुल
मिलाकर अगर आप ये सोच रहे हैं कि आने वाले समय में आपको बढ़ती महंगाई से राहत
मिलने वाली है तो फिर आप गलत हैं क्योंकि अर्थशास्त्र के आंकड़ें तो यही बता रहे
हैं कि हालात अभी बहुत जल्द सुधरते नहीं दिख रहे हैं और मंदी की सबसे बड़ी वजह
बंदी ही दिखाई दे रही है।


