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- क्या आप जानते है दया याचिका पर कैसे फैसला लेते हैं राष्ट्रपति....?
Posted by : achhiduniya
14 January 2020
निर्भया कांड के
दोषियो को पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा डेथ वॉरंट जारी होने
के बाद इन दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने 22
जनवरी को दोषियों को फांसी पर लटकाने का डेथ वॉरंट जारी किया था। इनमें से दो दोषियों विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट
मे क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की थी जिसे खारिज कर दिया है। जब अदालतों का दरवाजा हर तरफ से बंद हो जाए तो फांसी की सजा प्राप्त
गुनहगार राष्ट्रपति से क्षमा दान की गुहार लगाता है।
वह राष्ट्रपति से फांसी की
सजा कम को करने की मांग करता है। आम तौर पर क्षमादान की प्रक्रिया में सबसे पहले
राष्ट्रपति भवन मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए दया याचिका की एक कॉपी
गृह मंत्रालय को भेजता है। गृह मंत्रालय इस फाइल को संबंधित राज्य सरकार को भेजता
है जो अपने गृह और कानून मंत्रालयों से इस बारे में राय देने के लिए कहती है।
केंद्रीय कानून मंत्रालय से भी राय-मशविरा किया जाता है। इसके बाद मंत्रालय फाइल
राष्ट्रपति कार्यालय को भेजता है।
उस राय के मद्देनजर राष्ट्रपति को यह फैसला लेना
होता है कि उस व्यक्ति को क्षमादान दिया जाए या नहीं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के पास सजा माफ करने, फांसी की सजा पर रोकने या उसे रद्द करने, फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने, उम्रकैद को कम करने या माफ करने का अधिकार होता है। राज्यपाल को
यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 161 से प्राप्त है।


