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- कैंसर ग्रस्त है पूरा सिस्टम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को हड़काया....
Posted by : achhiduniya
15 January 2020
निर्भया गैंग रेप के दोषियो को कोर्ट ने 7 जनवरी को जारी किए गए डेथ वॉरंट के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस दौरान जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता ढींगरा की पीठ ने दोषी मुकेश कुमार के वकील से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज किए जाने और सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा बरकरार रखने के बावजूद वह ढाई साल तक इंतजार क्यों कर रहा था? पीठ ने कहा,सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को आपकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी थी और मौत की सजा पर मुहर लगा दी थी। फिर आपको सुधारात्मक याचिका दायर करने से किसने रोका? आप चुप बैठ कर ढाई साल से इंतजार कर रहे थे? पीठ ने कहा,ऐसा सिर्फ चालाक कैदी करते हैं।
वह मौत
का वॉरंट जारी होने तक इंतजार करते रहते हैं और जैसे ही वॉरंट जारी होता है उसे
चुनौती दे देते हैं। याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन मामले के फैसले में यह स्पष्ट किया
गया है कि दोषी को तर्क पूर्ण समय सीमा में सुधारात्मक याचिका दायर करनी चाहिए। निर्भया गैंगरेप केस में दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन ने
आज कोर्ट को बताया कि 22 जनवरी को चारो दोषियों को फांसी नहीं हो सकती क्योंकि उनमें
से एक ने दया याचिका दायर की है और हमें आदेश का इंतजार करना पड़ेगा। इस दलील से
बिफरे अदालत ने कहा कि आपने एक ऐसी कैंसर ग्रस्त व्यवस्था की रचना की है जिसका
फायदा मौत की सजा पाए अपराधी उठा रहे हैं। बता दें कि कोर्ट की फटकार के बाद
दिल्ली सरकार ने केंद्र से दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज करने की अनुशंसा
की है।
अधिकारियों
ने जब अदालत को बताया कि जेल नियमों के अनुसार अब उन्हें अन्य दोषियों द्वारा भी
दया याचिका दायर किए जाने और उस पर राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार करना होगा, पीठ ने यह कहते हुए नाराजगी जताई कि किसी ने दिमाग नहीं लगाया
और पूरा तंत्र कैंसर से ग्रस्त है। दलीलें सुनने के बाद पीठ ने दिल्ली सरकार के
स्थाई अधिवक्ता अपराध मामलों के राहुल मेहरा से कहा, अगर आप
सभी दोषियों द्वारा दया याचिका का विकल्प इस्तेमाल किए जाने तक कार्रवाई नहीं कर
सकते, तो फिर आपके नियम खराब हैं। ऐसा लगता है कि किसी ने भी नियम
बनाते वक्त दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया। व्यवस्था कैंसर से ग्रस्त है।


