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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर [NPR] के लिए किसी कागजात या बायोमेट्रिक जानकारी देने के लिए नहीं कहा जाएगा...गृह मंत्रालय
Posted by : achhiduniya
15 January 2020
देश में रहने वालों का रजिस्टर है NPR देश में रहने वाले निवासियों का रजिस्टर है। नागरिकता कानून
1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम, 2003 के प्रावाधनों तहत यह स्थानीय (गांव/कस्बा) उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर
तैयार किया जाता है। नियम में इसका
उल्लंघन करने वाले पर एक हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। संशोधित
नागरिकता कानून [CAA] को लेकर देश के विभिन्न हिस्से में विरोध
प्रदर्शन के बीच पश्चिम बंगाल और केरल ने NPR को
अपडेट करने का काम फिलहाल रोक दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर राज्यों ने NPR से संबंधित प्रावधानों को अधिसूचित कर दिया है।
राष्ट्रीय
जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) पर पश्चिम बंगाल जैसे
राज्यों और विपक्षी दलों द्वारा जतायी गयी चिंताओं के बीच गृह मंत्रालय ने
बुधवार को कहा रजिस्टर को अपडेट करने के दौरान कागजात या बायोमेट्रिक जानकारी देने
के लिए नहीं कहा जाएगा। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि NPR कवायद के तहत विभिन्न प्रश्नों वाले फार्म को जल्द ही अंतिम रूप
दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कवायद के दौरान कोई भी कागजात देने के लिए नहीं कहा
जाएगा और बायोमेट्रिक जानकारी भी
नहीं ली जाएगी। हालांकि, रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय की वेबसाइट पर
उपलब्ध सूचना के मुताबिक एनपीआर डेटाबेस में जनसांख्यिकी के साथ ही बायोमेट्रिक
विवरण भी होंगे। इसमें कहा गया, एनपीआर का लक्ष्य देश में रहने
वाले हर निवासी का समग्र डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकी के साथ
बायोमेट्रिक विवरण भी होंगे। असम को
छोड़कर पूरे देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में NPR की कवायद वर्ष 2020 में
अप्रैल से सितंबर के बीच पूरी की जानी है। एनपीआर की कवायद के लिए केंद्रीय
मंत्रिमंडल ने 3941.35 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।


