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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कोर्ट में हाजिर हो इसे आदेश {समन} नहीं एक गुजारिश समझें...प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे
Posted by : achhiduniya
19 February 2020
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है कि सरकार ने सार्वजनिक और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं की। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में सुझाव दिया कि सरकार इस मामले में पेट्रोल-डीजल कार वालों से जुर्माना वसूल सकती है और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर सब्सिडी दे सकती है। कोर्ट ने सरकार को चार हफ्तों में मीटिंग कर इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित मामले में कोई फैसला लेने को कहा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई कदम उठा रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है।
साथ ही सरकार लिथियम ऑयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग पर भी
सब्सिडी देने की योजना लेकर आई है। इसके लिए सरकार बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी
लाई है। प्रधान न्यायाधीश {CJI} एसए बोबडे ने
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को कोर्ट में पेश होने को कहा,CJI ने कहा कि हम चाहते हैं कि गडकरी कोर्ट में आकर बताएं कि
प्रदूषण को नियंत्रित करने में आखिर दिक्कत कहां आ रही है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल
के इस पर विरोध जताने पर CJI ने साफ किया कि इसे समन नहीं
गुजारिश समझें। दरअसल, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी
गराडिया ने कोर्ट में कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री को पेश
होने को कहा गया तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा। इस पर प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे
ने कहा, हम आदेश नहीं दे रहे हैं।
इसे एक गुजारिश समझें। केंद्रीय
मंत्री के पास इनोवेटिव आइडियाज़ हैं, जिससे
प्रदूषण दूर करने में मदद मिल सकती है। देखिए वह कोर्ट में आ सकते हैं या नहीं। CJI ने आगे कहा,इसे आप निमंत्रण समझें, क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बारे में दूसरों के बजाय परिवहन
मंत्री को अच्छी समझ होगी। कोर्ट ने आगे कहा कि हम प्रदूषण को लेकर कोई समझौता
नहीं कर सकते। ये सिर्फ दिल्ली-एनसीआर का नहीं, बल्कि
देश का मामला है।


