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आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति की जानकारी वेबसाइटों पर अपलोड करने के बाद चुनावी टिकट देने के साथ बेदाग प्रत्याशी को टिकट नहीं देने का कारण बताना होगा? सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक पार्टियो को निर्देश....
Posted by : achhiduniya
13 February 2020
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस एस
रवींद्र भट की पीठ ने इसे राष्ट्रहित का मामला बताते हुए 31 जनवरी को याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग की
दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा था कि इस समस्या को
रोकने के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। पीठ ने चुनाव आयोग और याचिकाकर्ता अश्विनी
उपाध्याय को एक सप्ताह के भीतर के सामूहिक प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे। पीठ
वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी,जिसमें कहा गया था कि इस मामले में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने
आदेश दिया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार और उनकी
राजनीतिक पार्टियां
आपराधिक केसों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेंगी और नामांकन दाखिल करने के बाद कम
से कम तीन बार इसके संबंध में अखबार और टीवी चैनलों पर देना होगा,लेकिन इस संबंध में कदम नहीं उठाया गया। राजनीति के अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम
फैसला सुनाया। जस्टिस आर एफ़ नरीमन और जस्टिस एस रविन्द्रभट ने चुनाव आयोग और
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया
था, जिस पर आज फैसला सुनाते हुए राजनीतिक पार्टियों दिशानिर्देश
जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों के
आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी वेबसाइटों पर अपलोड करेंगी अगर आपराधिक पृष्ठभूमि
के व्यक्ति को चुनावी टिकट देती है उसका
कारण भी बताएंगी कि आखिर वो किसी बेदाग
प्रत्याशी को टिकट क्यों नहीं दे पाई? साथ ही
कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में
तमाम जानकारी अपने आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर देनी होगी। वहीं, पार्टियों को इस बारे में एक स्थानीय और राष्ट्रीय अखबार में भी
जानकारी देनी होगी। इस संबंध में सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका भी
दाखिल की गईं थी। चुनाव आयोग की ओर से
वकील विकास सिंह ने पीठ को बताया था कि अदालती आदेश का कोई असर नहीं हुआ है
क्योंकि 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने वाले 43 फीसदी नेता आपराधिक मामलों का सामना
कर रहे हैं। ऐसे में बेहतर तरीका ये है कि राजनीतिक दलों को ही कहा जाए कि वो ऐसे
उम्मीदवारों को ना चुनें।
इसके साथ ही ऐसे उम्मीदवार के जीतने की संभावना ही नहीं
बल्कि पार्टी आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट देने पर उसकी योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट की उम्मीदवार चुने जाने बाद 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को देनी होगी। कोई पार्टी अगर इन
दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कानून के तहत
कार्रवाई करेगा।



