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- 19 लाख रोजगार वादे का चुनौतिओ भरा ताज पहने सीएम नितीश कुमार की राह आसान नही....
Posted by : achhiduniya
18 November 2020
सत्ता पाने के लिए राजनैतिक पार्टिया एक दूसरे को नीचा दिखाने से लेकर लोक लुभावने वादे करती है। चुनाव जीतने व सरकार बनने के बाद वही वादे राजनैतिक पार्टिया को गले की हड्डी साबित होने लगते है। ऐसा ही बिहार विधान सभा चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव के 10 लाख सरकारी नौकरी देने के वादे के जवाब में बीजेपी ने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया था। अब
इसे नीतीश कुमार की मजबूरी कहा जाय या चालाकी, उन्होंने 19 लाख रोजगार देने के मामले में बीजेपी के संकल्प से अपना दामन छुड़ाने में लगी है। वैसे जहां तीन लाख नौकरियां संभव है, यानी शिक्षा विभाग, उसे उन्होंने अपने खेमे में रखा है। चुनावों के वक्त यह बात सामान्य तौर पर उभरी कि प्रवासी श्रमिकों में नीतीश सरकार के खिलाफ गुस्सा है। अब जब सारे रोजगार सृजन और उसके प्रबंधन से जुड़े महकमे जब बीजेपी कोटे में चले गए हैं तब यह सवाल भी एक तरह से अब बीजेपी के कोटे में ट्रांसफर हो गया है, कि वो अगले पांच साल में कितनी नौकरियां या रोजगार लोगों को देते हैं। बीजेपी ने बिहार चुनाव से पहले सुशील मोदी और नीतीश कुमार की राय से इतर राज्य में चार लाख नौकरियों समेत कुल 19 लाख रोजगार देने का वादा अपने चुनावी घोषणा पत्र यानी संकल्प पत्र में किया था। बीजेपी ने संकल्प पत्र में 5 सूत्र,1 लक्ष्य और 11 संकल्प व्यक्त किए थे। साथ ही पार्टी ने इसके लिए अगले पांच साल का रोडमैप भी जारी किया था। बीजेपी के संकल्प के


