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- सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस की महत्वता क्या है 52 राजाओ का राज.... ?
Posted by : achhiduniya
16 November 2020
दिवाली के दूसरे दिन सिख धर्म के अनुयायी बंदी छोड़ दिवस मनाते हैं। बंदी छोड़ दिवस मनाने का इतिहास पुराना है। जहांगीर के शासनकाल में सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बादशाह जहांगीर ने सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद साहिब को बंदी बना लिया था। गुरु हरगोविंद साहिब को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया गया, जहां 52 हिंदू राजा पहले से ही कैद थे। गुरु हरगोविंद साहिब को
बंदी बनाने के बाद संयोग से जहांगीर बहुत बीमार पड़ गया, काफी इलाज के बाद जब जहांगीर ठीक नहीं हुआ तब बादशाह के काजी ने उसे सलाह दी कि बीमार पड़ने की वजह एक सच्चे गुरु को कैद करना है। गुरु हरगोविंद साहिब को छोड़ दिया जाए। जहांगीर ने ऐसा ही किया। हालांकि जहांगीर के फैसले के बाद भी गुरु हरगोविंद साहिब ने ग्लावियर जेल से अकेले रिहा होने से इनकार कर दिया और बोले कि जब तक मेरे साथ बंदी सभी कैदियों को नहीं छोड़ा जाएगा, वे रिहा नहीं होंगे। गुरु हरगोविंद साहिब की दृढ़ता के सामने जहांगीर को झुकना पड़ा,लेकिन आदेश जारी करते वक्त मुगल बादशाह ने एक शर्त रख दी। जहांगीर की शर्त थी कि सिख गुरु के साथ वहीं राजा बाहर जा सकेंगे जो सीधे गुरुजी का कोई अंग या कपड़ा पकड़े होंगे। जहांगीर की सोच थी कि एक साथ ज्यादा राजा गुरु हरगोविंद साहिब के शरीर को छू नहीं पाएंगे और उसकी कैद में ही रह जाएंगे,लेकिन जहांगीर की चालाकी देखते हुए हरगोविंद साहिब ने एक बड़ा कुर्ता सिलवाया और उसमें 52 कलियां लगवाईं। इस एक-एक कली पकड़ते हुए सभी कैद राजा गुरु हरगोविंद साहिब के साथ जहांगीर की कैद से आजाद हो गए। मुगल बादशाह की कैद से रिहा होने के बाद जब गुरु हरगोविंद साहिब अमृतसर पहुंचे तो उनका दीप जलाकर स्वागत किया गया। आगे चलकर इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया

