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- स्वेछित जगह पर सेना में पोस्टिंग करने से सुप्रीम कोर्ट ने क्यू किया इन्कार....?
Posted by : achhiduniya
17 November 2020
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक
कर्नल की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा
कि सेना की पोस्टिंग का मामला ऐसा है, जिस पर
वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी को लद्दाख जैसे कठिन
स्थानों पर भी सेवा देनी होगी। याचिकाकर्ता ने जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी, जोकि सेना में एक कर्नल है, उन्हें 15 दिनों के भीतर अपने नया पदभार संभालने का निर्देश दिया था। न्यायाधीश
डी. वाई. चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा
बनर्जी की पीठ ने कहा कि चाहे वह लद्दाख हो, पूर्वोत्तर
हो या अंडमान एवं निकोबार द्वीप हो, किसी को
भी वहां जाना होगा। पीठ ने कहा, आपको शिकायत हो सकती है, लेकिन सेना में पोस्टिंग ऐसी चीज है, जिस पर हम हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे। पीठ ने सेना में दंपति
की संयुक्त पोस्टिंग के लिए किसी भी आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया गया। याचिकाकर्ता
ने राजस्थान के जोधपुर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अपनी पोस्टिंग को
चुनौती दी है। उनकी पत्नी पंजाब के भटिंडा में कार्यरत है। याचिकाकर्ता, जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) विभाग के एक अधिकारी हैं, जिन्होंने 15 मई के पोस्टिंग ऑर्डर को हाई
कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आरोप लगाया गया कि
उन्हें और उनकी पत्नी को दूर के स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया
है। अधिकारी ने जेएजी और अन्य के खिलाफ अपील दायर करते हुए दोनों की एक साथ
पोस्टिंग करने की मांग की। याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील देते
हुए कहा कि भटिंडा से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बीच की दूरी 3,500 किलोमीटर से अधिक है और अधिकारियों का साढ़े चार साल का बच्चा
है।



