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दूध खरीदने वाला गाय-भैंस लेकर जाता है क्या...? किसान आंदोलन पर घिनौनी राजनीति पर उतर आया विपक्ष...पीएम मोदी
Posted by : achhiduniya
15 December 2020
प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर जारी
किसानों के प्रदर्शन को लेकर गुजरात के कच्छ में
विकास की कई परियोजनाओं का शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि
किसानों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते
हुए कहा कि विपक्ष अपने हित साधने के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी
ने कहा कि आजकल दिल्ली के पास किसानों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। पीएम
मोदी ने कहा कि कृषि सुधारों को लेकर काफी लंबे समय से मांग की जा रही थी कि
किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचने की छूट हो, लेकिन अब विपक्ष में बैठे लोग किसानों को गुमराह
करने की कोशिश में लगे हुए हैं। किसानों को भ्रमित करने की साजिश चल रही है। उन्हें
डराया जा रहा है कि नए कृषि सुधारों के बाद किसानों की जमीन पर दूसरे कब्जा कर
लेंगे। आप बताइए, कोई डेयरी वाला आपसे दूध लेने का कॉन्ट्रेक्ट करता है तो वो आपके पशु ले जाता है क्या? देश पूछ रहा है कि अनाज और दाल पैदा
करने वाले छोटे किसानों को फसल बेचने की आजादी क्यों नहीं मिलनी चाहिए। कृषि
सुधारों की मांग वर्षों से की जा रही थी। अनेक किसान संगठन भी पहले से मांग करते
थे कि अनाज को कहीं भी बेचने का विकल्प दिया जाए। आज जो लोग विपक्ष में बैठकर
किसानों को भ्रमित कर रहे हैं, वो भी अपने समय में
इन सुधारों का समर्थन करते रहे हैं। वो किसानों को बस झूठे दिलासे देते रहे। जब
देश ने ये कदम उठा लिया तो वो अब किसानों को भ्रमित कर रहे है। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं किसान भाई-बहनों से फिर कह रहा हूं कि उनकी हर शंका के
समाधान के लिए सरकार 24 घंटे तैयार है। किसानों का हित पहले दिन से हमारी सरकार की
प्राथमिकता रहा है। एक समय था जब गुजरात के लोगों
की मांग थी कि कम से कम रात में खाना खाते समय तो बिजली मिल जाए। आज गुजरात देश के
उन राज्यों में से है, जहां शहर हो या गांव, 24 घंटे बिजली सुनिश्चित की जाती है। जल जीवन
मिशन के सवा साल में तीन करोड़ परिवारों को पानी के कनेक्शन से जोड़ा गया है। गुजरात में 80 प्रतिशत घरो में साफ पानी की
सुविधा दी गई। एक समय कहा जाता था कि कच्छ इतनी दूर है, विकास
का नामोनिशान नहीं है। कनेक्टिविटी नहीं है। चुनौती का एक प्रकार से ये दूसरा नाम
था। आज स्थिति ऐसी है कि लोग सिफारिश करते हैं। भूकंप ने भले कच्छ के लोगों के घर
गिरा दिए थे, लेकिन
इतना बड़ा भूकंप भी यहां के लोगों के मनोबल को नहीं तोड़ पाया। कच्छ के लोग फिर
खड़े हुए, आज
देखिए कि इस क्षेत्र को उन्होंने कहां से कहां पहुंचा दिया है। आज कच्छ की पहचान
बदल गई है।




