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- श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान को दृश्यमान करेगी गणतंत्र दिवस की विहंगम झांकी....
Posted by : achhiduniya
23 January 2021
गणतंत्र दिवस के पूर्व फुल ड्रैस रिहर्सल से पहले
मीडिया के साथ जानकारी साझा करते हुए पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि श्री
गुरु तेग़ बहादुर जी ने अमृतसर में 1 अप्रैल, 1621
को जन्म लिया था। मुगलों के विरुद्ध लड़ाई के दौरान बहादुरी दिखाने पर नौवें
पातशाह को उनके पिता एवं छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने तेग बहादुर
(तलवार के धनी) का नाम दिया था। ‘हिंद दी
चादर’ के तौर पर जाने जाते महान दार्शनिक,आध्यात्मिक रहनुमा और कवि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने 57 श्लोकों सहित 15 रागों में गुरबानी रची,जिसको दसवें पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में शामिल किया। नौवें पातशाह ने श्री गुरु नानक देव जी के मानवता के प्रति प्रेम,शांति,समानता और भाईचारे के शाश्वत संदेश का प्रचार करने के लिए दूर-दूराज तक यात्राएं की। औरंगजेब की कट्टर धार्मिक नीति और जुल्म का सामना कर रहे कश्मीरी
पंडितों की गाथा सुन कर
गुरू साहिब ने मुगल बादशाह को चुनौती दी थी। इस्लाम कबूलने से इंकार करने पर मुगल
बादशाह के आदेश पर नौवें पातशाह को 11 नवंबर, 1675 को चांदनी
चौक, दिल्ली में शहीद कर दिया गया था। श्री गुरु तेग़ बहादुर
जी के 400वें प्रकाश पर्व को दर्शाती समूची झांकी चारों ओर रूहानियत की आभा
बिखेरेगी। ट्रैक्टर वाले अगले हिस्से पर पवित्र पालकी साहिब सुशोभित होगी। ट्रेलर
वाले हिस्से के शुरू में प्रभात फेरी दिखाई जाएगी और संगत कीर्तन करती दिखाई
देगी।
ट्रेलर के आखिरी हिस्से में गुरुद्वारा श्री रकाब गंज साहिब को दिखाया गया है,
जो उस जगह स्थापित किया गया है, जहां भाई
लक्खी शाह वंजारा जी और उनके पुत्र भाई नगाहिया जी ने गुरू साहिब के बिना शीश के
शरीर का संस्कार करने के लिए अपना घर जला दिया था। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस बार पंजाब की झांकी,शाश्वत मानवीय नैतिक-मूल्यों,धार्मिक
सह-अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखने की ख़ातिर अपना जीवन कुर्बान
करने वाले नौवें पातशाह श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान को दृश्यमान
करेगी।



