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- “मानुख की जात सभे एकै पहचानबों” का संदेश देने वाले श्री गुरु गोविंद सिंह जयंती विशेष....
Posted by : achhiduniya
19 January 2021
सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना
हमें यह सिखाती है कि कैसे हमें दूसरों से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए? उन्होंने उस समय के अत्याचारी शासकों के खिलाफ युद्ध किया। उनके
प्रिय शिष्य भाई कन्हैया थे, जिन्हें युद्ध के मैदान में
घायल सिपाहियों को पानी पिलाने की सेवा दी गई थी,लेकिन
भाई कन्हैया केवल अपनी तरफ के सिपाहियों को ही नहीं, बल्कि
दुश्मनों के घायल सिपाहियों को भी पानी पिलाते थे। तो कुछ लोग गुरु गोविंद सिंह जी
के पास गए और उन्होंने उनसे भाई कन्हैया के इस व्यवहार की शिकायत की। तब गुरु
गोविंद सिंह जी ने भाई कन्हैया से इसका जवाब पूछा तो भाई कन्हैया ने गुरु साहब को
यह कहा कि,
मैं जहां भी आपकी ज्योति देखता हूं, मैं वहीं पानी पिला देता हूं। यह सुनकर गुरु गोविंद सिंह जी ने फरमाया कि यही एक ऐसा व्यक्ति
है, जिसने मेरी शिक्षा को सही रूप में समझा और उस पर अमल किया। तब
उन्होंने भाई कन्हैया को यह भी हुकुम दिया कि अब आगे से पानी ही नहीं, बल्कि उन सिपाहियों की मरहम-पट्टी भी किया करें। न सिर्फ सिख इतिहास से, बल्कि सभी धर्म-ग्रंथों से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हम एक
सदाचारी जीवन व्यतीत करें। सदाचारी जीवन की कुंजी ही हमारी आत्मा के सभी दरवाजों
को खोल सकती है। सदाचारी जीवन का अर्थ यह है कि हम अपने जीवन में से अवगुणों को
बाहर निकालें और सद्गुणों को अपनाएं। अगर हमें भाई कन्हैया की तरह सभी जीवों में
परमात्मा की ज्योति देखनी है, तो हमें सबसे प्रेम





