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- सोशल मीडिया को कानून के दायरे में लाया जाए...सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
Posted by : achhiduniya
31 January 2021
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका में मांग की गई है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने के लिए अलग कानून बनाने के लिए केंद्र को आदेश दिया जाए। सोशल मीडिया हाउस यानी फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि को सीधे तौर पर समाज के बीच नफरत फैलाने वाले भाषणों के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए निर्देश दिया जाए। सोशल मीडिया के माध्यम से घृणा और फर्जी
समाचार फैलाने में शामिल व्यक्तियों पर आपराधिक केस चलाने के लिए अलग कानून बनाने के लिए निर्देश दिया जाए। केंद्र को एक तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया जाए कि जो कम समय सीमा के भीतर ही हेट स्पीच और फर्जी समाचार को अपने आप हटा दें ताकि इस तरह के नफरत भरे भाषणों या फर्जी समाचारों के काउंटर उत्पादन को कम से कम किया जा सके। दलील में कहा गया है कि भारत में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया एक हानिकारक भूमिका निभा रहा है और इस दुरुपयोग को रोकने का समय आ गया है। यह तर्क दिया गया है कि सोशल नेटवर्किंग साइटें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं क्योंकि इनका उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मैच फिक्सिंग, आतंकवाद, हिंसा भड़काने और अफवाह फैलाने वाले उपकरण के रूप में किया जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि उच्चतम न्यायालय की ओर से केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से नफरत फैलाने वाली और फेक न्यूज के प्रसार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए अलग से कानून बनाए। इस याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, दूरसंचार मंत्रालय, ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और फेसबुक इंडिया आदि को प्रतिवादी बनाया गया है। यह याचिका एडवोकेट विनीत जिंदल ने दायर की है, जिसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने मजबूर होते हुए वर्तमान में यह जनहित याचिका दायर की है ताकि प्रतिवादियों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म को विनियमित एवं नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने का निर्देश दिया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक जटिल अधिकार है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मुकम्मल नहीं है और इसके साथ विशेष कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का पालन करना होता है इसलिए यह अधिकार कानून द्वारा प्रदान किए गए कुछ प्रतिबंधों के अधीन होता है। याचिका में कहा गया है कि, सोशल मीडिया के लिए अलग-अलग देशों द्वारा लागू किए गए विनियमन मानकों को देखना भी जरूरी है, ताकि ऐसे दिशानिर्देशों को प्रस्तुत किया जा सके जो बोलने की आजादी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म की जवाबदेही के बीच संतुलन बना सकें।



