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- घोर लापरवाही घर में RT-PCR स्वैब किट पैक करती महिलाएं और बच्चे..
Posted by : achhiduniya
06 May 2021
कोरोना संक्रमितों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों में बेड की कमी साफ देखी जा रही है, कई मरीज इलाज न मिलने की वजह से दम तोड़ रहे हैं। कोरोना की इस गंभीर स्थिति में बीते दिन उल्हासनगर से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें बच्चे और महिलाएं बिना किसी सावधानी और साफ-सफाई के घर में RT-PCR स्वैब किट पैक करते हुए दिखाई दिए थे,कोविड टेस्ट किट की पैकिंग का वीडियो सामने आते ही तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासन जागा है
और इस मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में उल्लासनगर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। FIR ठेकेदार के खिलाफ दर्ज की गई है। ठेकेदार के दफ्तर में भी छापा मारा गया, लेकिन वो वहां नहीं मिला। पुलिस ठेकेदार को तलाश कर रही है। वहीं, जिन घरों में पैकिंग का काम हो रहा था, उनके भी बयान दर्ज किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, उल्हासनगर पुलिस और महानगर पालिका के कर्मचारियों ने पैकिंग की जगह पर पहुंचकर कोविड टेस्ट किट की स्टिक जब्त कर ली हैं। उल्हासनगर मनपा के अधिकारी युवराज भदाने ने बताया है कि ये काम मनपा की तरफ से नहीं दिया गया था। किसी निजी कंपनी ने घर-घर में कोविड टेस्ट किट की स्टिक पैक करने का काम दिया था। उन्होंने आगे बताया कि इस मामले में प्रथमिक रिपोर्ट बनाकर FDA और पुलिस को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई अब FDA और पुलिस कर रही हैं। गौरतलब है की मंगलवार को उल्हासनगर के खेमानी संत दिनेश्वर नगर के सक्रिय स्थानीय लोगों ने दो बच्चों को स्वाब की लकड़ियों को बांधने में व्यस्त पाया। दस से अधिक घरों में इस कार्य में ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा उपायों के बिना मास्क पहनना या सैनिटाइजर या दस्ताने का उपयोग करके नामांकित किया गया है। सतर्क नागरिकों ने एक वीडियो तैयार किया और अब इसे वायरल कर दिया है। स्वैब किट अंबरनाथ में स्थित एक फर्म में तैयार की जाती हैं और ठेकेदारों के माध्यम से यह पैकिंग के लिए झुग्गी में पहुंचती हैं। उनमें से कई बेरोजगार हैं और नकदी की जरूरत है। 1000 स्टिक्स की पैकिंग के लिए हमें 20 रुपये का भुगतान किया जाता है। एक एकल व्यक्ति प्रतिदिन 100 रुपये प्राप्त करने के लिए 5,000 ऐसी पैकिंग करता है। एक 30 वर्षीय महिला ने कहा अगर हम घर पर पांच लोग हैं तो हम एक दिन में 500 रुपये कमाते हैं। हम पास के बच्चों को दाखिला देते हैं, जो पॉकेट मनी प्राप्त करने के लिए मोबाइल चलाने की बजाय कई बार करते हैं। हैरानी की बात यह है कि टेस्ट किट को पैक करते हुए न तो कोई सावधानी बरती जा रही थी और न ही साफ-सफाई का ख्याल रखा जा रहा था। कोविड टेस्ट किट पैक करने वाले बच्चों और महिलाओं ने न ग्लव्स पहने थे और न ही मास्क लगाया हुआ था। इस मामले की वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने अब जांच शुरू कर दी है।


