- Back to Home »
- Crime / Sex »
- गांव की 17 फीसदी लड़के-लड़कियां और शहरों की 10 फीसदी लड़के-लड़कियां शादी से पहले ही सेक्स का अनुभव कर चुके होते हैं....सर्वे
गांव की 17 फीसदी लड़के-लड़कियां और शहरों की 10 फीसदी लड़के-लड़कियां शादी से पहले ही सेक्स का अनुभव कर चुके होते हैं....सर्वे
Posted by : achhiduniya
06 June 2021
पोर्नोग्राफी और सेक्स ऐजूकेशन की किताबों के बीच एक बहुत ही
महीन सी दीवार होती है। इस तरह की जानकारी काफी हद तक पति पत्नी के बीच जिस्मानी
संबंधों को ले कर फैली हुई भ्रांतियों को दूर करती है। इस को गलत तब कहा जा सकता
है जब इस कोई गलत भावना से देखें या फिर जबरदस्ती किसी लड़की या लड़के को दिखाएं।
पहले बड़ा परिवार होता था। इन में भाभी, बड़ी
ननद, बूआ और बड़ी बहन जैसे तमाम रिश्ते होते थे जो लड़की को शादी के
बाद जिस्मानी संबंधों के बारे में बताती थीं। अब इस तरह के रिश्ते कम हो गए हैं।
लड़कियां अपने करियर और दूसरे मसलों में इतना उलझी हुई होती हैं कि वे अपने परिवार
के लोगों से इतना नहीं घुलमिल पाती हैं कि उन से जिस्मानी संबंधों पर बात कर सके।
इस के चलते शादी के बाद जिस्मानी संबंधों को ले कर वे अनजान ही बनी रहती हैं। जिन
दोस्तों या सहेलियों के जरीए उन को पता चलता है, वह भी
सही जानकारी नहीं दे पाते हैं। कभी कभी इन जानकारियों की कमी में लड़कियों को
कुंआरी मां बनने तक की नौबत आ जाती है। गांव हो या शहर, पोर्न फिल्मों का चलन बढ़ाने में मोबाइल फोन का सब से अहम रोल
रहा है। मोबाइल फोन पर ऐसी फिल्में लोड करने का अलग कारोबार चल पड़ा है। 1,500 से 2,000 रुपए की कीमत में ऐसे मोबाइल
फोन बाजार में आ गए हैं जिन में 2 जीबी से ले कर 10 जीबी तक के मैमोरी कार्ड लगते हैं। ये कार्ड 200 रुपए की कीमत में मिल जाते हैं। इस कार्ड में ऐसी पोर्न
फिल्में आसानी से लोड कराई जा सकती हैं। जिन लोगों के पास कंप्यूटर या लैपटौप जैसे
महंगे साधन नहीं हैं उन के लिए मोबाइल फोन सब से अच्छा साधन बन गया है। पहले कुछ
लोग साइबर शॉप पर जाते थे पर वहां परेशानी होती थी। अब जिन लोगों के मोबाइल फोन
में इंटरनैट चलाने की सुविधा है वे सीधे पोर्न फिल्में देख सकते हैं। आमतौर पर
अपने देश में इस तरह की सेक्स ऐजूकेशन को गलत माना जाता है। इस की कमी में
लड़कियां सेक्स से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। अपने देश में भले ही
सेक्स सिखाने वाली किताबों को पोर्नोग्राफी माना जाता हो लेकिन दूसरे देशों में इस
को इलाज के रूप में लिया जाता है। एक डाक्टर बताते हैं,जब मेरे पास कोई लड़का इस बात की शिकायत ले कर आता है कि वह
नामर्दी का शिकार है, उस के अंग में तनाव नहीं आता
है तो यह देखना पड़ता है कि यह तनाव हमेशा नहीं आता या फिर कभी कभी आता भी है। जब
लड़का कहता है कि सेक्स की किताबें पढ़ कर या फिर ब्लू फिल्में देख कर तनाव आता है, तब यह पता चलता है कि उस लड़के की नामर्दी केवल मन का वहम है
अगर इस हालत में भी तनाव नहीं आता है तो उस का इलाज थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
विदेशों में पोर्नोग्राफी को ले कर कई तरह की रिसर्च होती रहती हैं। इसी तरह की एक
रिसर्च बताती है कि ब्लू फिल्में देखने से आदमी के शुक्राणुओं की गति तेज हो जाती
हैं। पोर्नोग्राफी को विदेशों में एक कला की तरह देखा जाता है। कुछ कलाकार तो
दूसरी फिल्मों में भी काम कर के अपना नाम कमाते हैं। सेक्स संबंधों की काउंसलिंग
करने वाले कुछ डाक्टरों का कहना है कि अपने देश में भी पोर्न फिल्मों को दिखा कर
नामर्दी का इलाज करना कानूनी रूप से सही माना जाना चाहिए। कानून को इस बात की
इजाजत देने के बारे में सोचना चाहिए। जब नामर्दी दूर करने के लिए दवाएं बनाई जाती
हैं तो उन का असर देखने के लिए भी ब्लू फिल्मों का इस्तेमाल किया जाता है।
पोर्नोग्राफी का इस्तेमाल जब पति पत्नी आपसी समझदारी के साथ करते हैं तो उन के रिश्ते
रोचक हो जाते हैं। सेक्स संबंध शादीशुदा जोड़ों की बड़ी जरूरत होते हैं।कभी कभी जब
ये संबंध टूटते हैं तो इन का असर शादीशुदा जिंदगी पर भी पड़ता है। हमारे समाज में
औरतों को सेक्स के बारे में अपनी बात कहने से रोका जाता है। इस के उलट आदमी सेक्स को ले कर हर तरह का
प्रयोग करना चाहता है। जब पति-पत्नी के बीच इस तरह की परेशानी आती है तो पति दूसरी
औरत की तरफ भागने लगता है। आज भी सेक्स को ले कर पत्नी में एक झिझक रहती है। उस को
लगता है कि अगर सेक्स को ले कर उस ने पहल की तो उसे ही बदचलन मान लिया







