- Back to Home »
- Knowledge / Science »
- रोशनी और पानी से बनेगी सस्ती हाइड्रोजन...
Posted by : achhiduniya
03 October 2021
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के द्वारा दी गयी जानकारी के
मुताबिक वैज्ञानिकों की एक टीम ने पहली
बार एक बड़े पैमाने का रिएक्टर विकसित किया है जो सूर्य के प्रकाश और पानी जैसे
स्रोतों का उपयोग करके पर्याप्त मात्रा में हाइड्रोजन का उत्पादन कर सकता है। भारत
मे सूरज की रोशनी और पानी की कमी नहीं है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ये
तकनीक आने वाले समय मे साफ ऊर्जा को पाने में काफी मददगार साबित होगी। दरअसल भारत
ने 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का
लक्ष्य रखा है, जिसके लिये सरकार ऐसे
नये उपायों पर फोकस कर रही
है, जो उसे इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करें। इस रिएक्टर को
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के एक स्वायत्त
संस्थान नैनो विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) मोहाली के डॉ. कमलकन्नन
कालीसम और उनकी टीम ने तैयार किया है। टीम ने जानकारी दी है कि सूरज की रोशनी और
पानी का इस्तेमाल कर ये रिएक्टर 8 घंटे में 6.1 लीटर हाइड्रोजन का उत्पादन करने में सक्षम है। टीम ने इसके
पेंटेट के लिये आवेदन
कर दिया है। मंत्रालय की रिलीज के मुताबिक फिलहाल इस तकनीक
से प्राप्त हाइड्रोजन के इस्तेमाल से दूर दराज के इलाके में फ्यूल सेल के माध्यम
से बिजली उत्पादन, हाइड्रोजन स्टोव और छोटे गैजेट्स को बिजली देने
जैसे काम किये जा सकते हैं। हालांकि टीम का मुख्य लक्ष्य ऐसे रिएक्टर की मदद से
आने वाले समय में ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिक व्हीकल को पावर देना है। भारत सरकार
लगभग सभी योजनाओं में निजी क्षेत्र को साथ लेकर चल रही है। सरकार रिसर्च को मदद
देती जिससे नई तकनीक का विकास हो बाद में इनके कमर्शियल प्रोडक्शन में टेक्नोलॉजी
ट्रांसफर के जरिये निजी क्षेत्रों की क्षमता का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादन
बढ़ने से क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर होता है, वहीं
एक्सपोर्ट्स के जरिये नये अवसर भी खुलते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन के शुरू होने
पर रोजगार के अवसर भी मिलते हैं। कोरोना संकट से लेकर कई अन्य महत्वाकांक्षी
योजनाओं तक में सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिये निजी क्षेत्र को साथ जोड़ा
है।


