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असिस्टेंट प्रोफेसर पद भर्तियों के लिए पीएचडी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने
Posted by : achhiduniya
02 October 2021
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर से कोरोना वायरस के कारण अहम फैसला लिया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए
पीएचडी अनिवार्य होने के कारण बहुत से उम्मीदवार निराश हो जाते थे। शिक्षा मंत्री
ने कहा कि विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्तियों के लिए पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी अब बिना पीएचडी
वाले छात्र भी इस पद के लिए आवेदन के पात्र होंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पीएचडी
की अनिवार्यता से राहत इसलिए दी गई है क्योंकि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो
साल से
स्कॉलर्स की पीएचडी पूरी नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा पहले देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद
पर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य कर दी गई थी,लेकिन अब
इस मानदंड को हटा लिया गया है ताकि रिक्त पदों को समय पर भरा जा सके और फैकल्टी/प्रोफेसरों
की कमी के चलते पढ़ाई प्रभावित न हो। अब पीजी डिग्री वाले उम्मीदवार, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है, असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पात्र होंगे। यूजीसी
जल्द ही इस फैसले के संबंध में
सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक परिपत्र जारी
करेगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सभी खाली सीटों को जल्दी भरने में मदद
मिलेगी। इससे पहले
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए यूजीसी नेट परीक्षा पास होना जरूरी होता था,लेकिन 2018 में सरकार ने कहा कि इस पद के
लिए पीएचडी अनिवार्य होगी। इसके बाद सरकार ने उम्मीदवारों को अपनी पीएचडी पूरी करने
के लिए तीन साल का समय दिया था।


