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- गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने पर छिड़ी सियासी जंग..
Posted by : achhiduniya
19 June 2023
गोरखपुर स्थित गीता प्रेस की स्थापना साल 1923 में हुई थी।
गीता प्रेस दुनिया में सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है। इसने 14 भाषाओं में
41.7 करोड़ किताबों का प्रकाशन किया है,जिनमें 16.21 करोड़
श्रीमद भगवद गीता पुस्तकें शामिल हैं। खास बात ये है कि इस संस्था ने पैसा कमाने
के लिए कभी भी अपने प्रकाशनों के लिए विज्ञापन नहीं लिए। साल 1995 में राष्ट्रपिता
महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप
में इस पुरस्कार की स्थापना की गई थी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गीता प्रेस को
गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के फैसले की आलोचना की है। सूत्रों से जानकारी मिली
है कि कांग्रेस पार्टी जयराम रमेश के ट्वीट से
सहमत नहीं है। जयराम रमेश
ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का विरोध किया है। उन्होंने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार
दिए जाने की तुलना सावरकर और गोडसे से की है। जयराम रमेश ने ट्ववीट में लिखा,2021 के लिए
गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को प्रदान किया गया है जो इस साल
अपनी शताब्दी मना रहा है। अक्षय मुकुल द्वारा इस संगठन की 2015 की एक बहुत
ही बेहतरीन जीवनी है
जिसमें वह महात्मा के साथ इसके तूफानी संबंधों और उनके
राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चल रही
लड़ाइयों का पता लगाता है। यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और सावरकर और गोडसे को
पुरस्कार देने जैसा है। गांधी शांति पुरस्कार के साथ ही गीता प्रेस को एक करोड़
रुपये की राशि से सम्मानित किया जाना है,लेकिन गीता प्रेस मैनेजमेंट ने एक करोड़
की सम्मान राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ये बात गीता प्रेस के प्रबंधक
डॉ लालमनी तिवारी ने कही।