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- समान “आपराधिक संहिता”और समान “नागरिक संहिता”[कानून] में क्या है अंतर..?
Posted by : achhiduniya
30 June 2023
समान नागरिक संहिता यानी सभी धर्मों के लिए एक ही कानून। अभी होता
ये है कि हर धर्म का अपना अलग कानून है और वो उसी हिसाब से चलता है। भारत में आज
भी ज्यादातर धर्म के लोग शादी, तलाक और जमीन जायदाद विवाद जैसे मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ
के मुताबिक करते हैं। मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय के अपने पर्सनल लॉ हैं। जबकि हिंदू सिविल लॉ
के तहत हिंदू,
सिख, जैन और बौद्ध आते हैं। समान
नागरिक संहिता को अगर लागू किया जाता है तो सभी धर्मों के लिए फिर एक ही कानून हो
जाएगा
यानि जो कानून हिंदुओं के लिए होगा, वही कानून मुस्लिमों और ईसाइयों पर भी लागू होगा। अभी
हिंदू बिना तलाक के दूसरे शादी नहीं कर सकते, जबकि मुस्लिमों को तीन शादी करने की इजाजत है। समान नागरिक
संहिता आने के बाद सभी पर एक ही कानून होगा, चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या मजहब का ही क्यों न हो। बता दें कि अभी भारत में
सभी नागरिकों के लिए एक समान आपराधिक संहिता है, लेकिन समान नागरिक कानून नहीं है।
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