- Back to Home »
- Knowledge / Science »
- विश्व सिकलसेल दिवस पर जाने बीमारी लक्षण व बचाव डॉ. विंकी रुघवानी से..
Posted by : achhiduniya
19 June 2023
नागपुर:- सिकलसेल एक अनुवांशिक और खतरनाक
बीमारी है। यह अनुवांशिक रोग बौद्ध, तेली, महार, कुनबी और आदिवासी समुदाय
में अधिक है। आमतौर पर यह रोग लगभग सभी समुदायों में किसी न किसी हद तक पाया जाता
है। इस बीमारी से पीड़ित लोगों को भारत के कुछ हिस्सों में अधिक देखा जा सकता है।
विदर्भ ऐसी ही एक जगह है। सिकलसेल रोग से पीड़ित रोगी को हाथ-पैर, पेट और पूरे शरीर में
बार-बार दर्द होता है। इस बदन दर्द के लिए इन मरीजों को कई बार अस्पताल में भर्ती
कराना पड़ता है। हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने के कारण मरीजों को कभी-कभी रक्त
चढ़ाना पड़ता है। इन रोगियों को जीवन भर हाइड्रोक्सीयूरिया, फोलिक एसिड और
अन्य दवाएं
लेनी पड़ती हैं। उन्हें अक्सर रक्त परीक्षण,सोनोग्राफी आदि से भी गुजरना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ, रोगी रोग की जटिलताओं से
पीड़ित होती हैं। सिकलसेल रोग का स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन
है जिसकी लागत लगभग 14 से 15लाख है। बोन मैरो
ट्रांसप्लांटेशन के लिए एचएलए मैच करवाना भी मुश्किल है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया
बहुत जोखिम भरी है। इस बीमारी पर पूरी तरह से काबू पाया जा सकता है। यह रोग पूरी
तरह से रोके जाने योग्य है। सिकलसेल रोग (एसएस पैटर्न) के बच्चे का जन्म तभी होता
है जब उसके माता-पिता दोनों में सिकलसेल ट्रेट हो। सिकलसेल ट्रेट वाले व्यक्ति
बिल्कुल सामान्य हैं।
जब सिकलसेल ट्रेट वाले लड़के का विवाह सिकलसेल ट्रेट वाले लड़की
से होता है तो सिकलसेल रोग वाले बच्चे के जन्म होने की संभावना होती है। इसलिए
शादी से पहले लड़के और लड़कियों के लिए सिकलसेल ट्रेट का परीक्षण करवाना आवश्यक
है। यह परीक्षण इस बीमारी को रोकने में काफी मददगार साबित हो सकता है। हाल के बजट
में केंद्र की मोदी सरकार ने घोषणा की है कि 2047 तक हमारा देश सिकल सेल
मुक्त हो जायेगा। उसके लिए सिकलसेल मिशन के तहत 2027 तक 7 करोड़ लोगों की जांच की जाएगी।
यह एक स्वागत योग्य कदम है और हमारे देश में
सिकलसेल रोग की रोकथाम पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा, पिछले कुछ वर्षों से सिकलसेल रोग को विकलांग व्यक्तियों के
अधिकार अधिनियम 2017 की सूची में शामिल किया
गया है। इस बीमारी को विकलांगता सूची में शामिल करने से इस बीमारी से पीड़ित
बच्चों को शिक्षा में आरक्षण मिलता है, लेकिन कड़े मापदंड के कारण सिकलसेल रोग के कई रोगियों को विकलांगता प्रमाण
पत्र नहीं मिल रहा है। इसलिए हमारे संस्था ने सरकार से अनुरोध किया है कि सभी
सिकलसेल रोगियों को जल्द से जल्द विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में
तेजी लाएं व मापदंड मे परिवर्तन किया जाए। हमने सरकार से सिकलसेल रोग को भी शिक्षा
के अलावा नौकरियों में आरक्षण पाने वाले विकलांगों की सूची में शामिल करने का
अनुरोध किया है।
![]() |
[डॉ. विंकी रुघवानी] |