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- आखिर क्यू IPC की धारा 124-A देशद्रोह/राजद्रोह कानून के नैतिक उपयोग और द्रुपयोग पर छिड़ी बहस..?
Posted by : achhiduniya
04 June 2023
देशद्रोह या राजद्रोह कानून पर
रोक लगे एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। अब भारतीय विधि आयोग (Law Commission of India) ने कहा है कि देशद्रोह कानून को रद्द करने की जरूरत नहीं है। विधि आयोग ने कुछ
संशोधन के साथ देशद्रोह कानून को बनाए रखने और न्यूनतम सजा को बढ़ाए जाने की
सिफारिश की है। सिफारिशों से जुड़ी एक रिपोर्ट कानून मंत्रालय को भेजी गई है। बीते 11 मई 2022. वो तारीख, जब सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून यानी IPC की धारा 124-A के तहत मामले दर्ज करने पर रोक लगा दी थी।
तत्कालीन चीफ जस्टिस NV रमण की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने देशभर में इस कानून के तहत चल रही
जांचों, लंबित मुकदमों और कार्रवाइयों पर भी रोक लगा दी थी और कहा था कि इसकी समीक्षा
और पुन: परीक्षण होने तक इसका इस्तेमाल न किया जाए। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने
सरकार को अपना मत रखने के लिए भी कहा था। विधि आयोग का कहना है कि IPC की धारा 124-A (देशद्रोह) को कुछ संशोधनों के साथ बरकरार रखा जाना चाहिए। आयोग ने इस कानून
में अधिक स्पष्टता लाने के लिए संशोधन की सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि
देशद्रोह कानून को खत्म न किया जाए, भले ही केदारनाथ
सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर कुछ संशोधन किए
जा
सकते हैं। विधि आयोग ने कहा कि भारत की एकता और
अखंडता की रक्षा के लिए देशद्रोह कानून को बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि
भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा मौजूद है। भारत के खिलाफ कट्टरता फैलाने और
सरकार के प्रति नफरत पैदा करने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। नागरिकों की
स्वतंत्रता तभी सुनिश्चित की जा सकती है, जब राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित
की जाए। अक्सर विदेशी ताकतों और फंडिंग के जरिये देश में कट्टरता, हिंसा
फैलाई जाती है, इसलिए और भी जरूरी है कि धारा 124ए
लागू रहे। IPC की धारा 124-A (देशद्रोह) की सजा बढ़ाई जाए। इसे न्यूनतम 3 साल
से बढ़ाकर 7 साल तक की जेल के साथ दंडनीय बनाया जाए। बता दें कि इसके
लिए अधिकतम सजा उम्र कैद है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को
लिखे अपने कवरिंग
लेटर में 22वें विधि आयोग के
अध्यक्ष जस्टिस ऋतुराज अवस्थी (सेवानिवृत्त) ने कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा है, IPC की धारा 124-A जैसे प्रावधान न हों तो
सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली किसी भी अभिव्यक्ति पर निश्चित रूप से विशेष
कानूनों और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाए
, जिसमें आरोपियों से
निपटने के लिए बेहद कड़े प्रावधान हों। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि कुछ
देशों ने देशद्रोह कानून को खत्म कर दिया है, लेकिन केवल इस आधार पर भारत में भी IPC की धारा 124-A को केवल इस आधार पर
निरस्त कर देना,
मौजूदा
जमीनी हकीकत से आंखें मूंद लेने जैसा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस
कानून को निरस्त करने से देश की अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता पर असर पड़ सकता है।