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- Online Gaming 28% GST दर से भड़के प्रायोजक
Posted by : achhiduniya
12 July 2023
नजारा, गेम्सक्राफ्ट, जुपी और विंजो जैसी
गेमिंग कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (एआईजीएफ) ने
अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि जीएसटी काउंसिल का यह फैसला असंवैधानिक और तर्कहीन
है। इस बीच
हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में उतरे भारत-पे के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर
ने भी सरकार के फैसले पर खुलकर नाराज़गी जताई है। उन्होंने
ट्विटर पर अपनी बात रखी
है। अश्नीर ने क्रिकपे नाम से ऑनलाइन गेमिंग स्टार्टी की थी। उन्होंने ट्वीट किया, आरआईपी (RIP) -
भारत में रियल मनी
गेमिंग उद्योग,अगर सरकार सोच रही है कि ₹72 पॉट एंट्री (28% सकल जीएसटी) पर खेलने
के लिए लोग ₹100 लगाएंगे; और यदि वे ₹54 जीतते हैं (प्लेटफ़ॉर्म
शुल्क के बाद) - तो उन्हें उस पर 30% टीडीएस का भुगतान करना होगा- जिसके लिए उन्हें
पहले मॉनसून
में अपने लिविंग रूम में मुफ्त स्विमिंग पूल मिलेगा- ऐसा नहीं हो रहा
है! उन्होंने आगे लिखा,फंतासी गेमिंग
उद्योग का हिस्सा बनना
अच्छा था। जिसकी अब हत्या हो चुकी है। इस मॉनसून में 10 अरब डॉलर बरबाद हो गए। इसके
साथ ही उन्होंने लिखा,स्टार्टअप संस्थापकों के लिए राजनीति में प्रवेश
करने और प्रतिनिधित्व करने का समय आ गया है या यह एक के बाद एक उद्योग का भविष्य
होने जा रहा है। भाविन पांड्या का कहना है कि यह फैसला हतोत्साहित करने वाला है।
यह सुनकर काफी आश्चर्य हुआ। हम लोग काफी परेशान हैं। यह सब तब हुआ है जब हम लगातार
सरकार,
नौकरशाह और हर उस विभाग
के साथ लगातार भागदौड़ करके इंडस्ट्री के अंतररष्ट्रीय मानकों और प्रचलन के बारे
में समझा रहे थे। भाविन ने कहा कि हमने यह भी बताने की कोशिश की कि क्या किया जाना
चाहिए जिससे यह इंडस्ट्री आगे बढे़।
साथ ही यह भी बताया कि किस प्रकार सरकार इस
उद्योग से ज्यादा से ज्यादा टैक्स भी प्राप्त कर सकती है। यह दुर्भाग्य की बात है
कि इतना सब कुछ करने के बाद भी जीएसटी काउंसिल की ओर से यह फैसला लिया गया है। इस
बारे में रोलैंड
लैंडर्स ने कहा कि यह गेम्स ऑफ स्किल के इंडस्ट्री के 60 साल के ज्यूरिसप्रूडेंस
के खिलाफ है। यह चिंता का कारण है। उन्होंने बताया कि जब प्रत्यक्ष कर और
अप्रत्यक्ष कर के बारे में बात हो रही थी तब इंडस्ट्री के सुझावों का स्वागत किया
गया था और तब गेम ऑफ स्किल और गेम ऑफ चांस पर साफ तौर पर अंतर रखा गया था। सरकार और
इंडस्ट्री ने साथ काम किया था। बता दें कि माल एवं
सेवा कर परिषद ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों, कसीनो
और घुड़दौड़ में दांव पर लगायी जाने वाली कुल राशि पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगाने का मंगलवार को फैसला किया था।