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E-FIR नहीं बच पाएंगे गुनहगार सरकार ने किए बदलाव के साथ नए कानून शामिल..जाने क्या है विशेष प्रावधान..?
Posted by : achhiduniya
12 August 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में सीआरपीसी की 478 धाराओं के बजाय 533 धाराएं होंगी। इस बीच, 160 धाराओं में संशोधन किया
गया है और 9 धाराओं को निरस्त करने के
अलावा 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं। वहीं
भारतीय न्याय संहिता में आईपीसी की 511 धाराओं की जगह 356 धाराएं होंगी। इसकी कुल 175 धाराओं में संशोधन किया गया है, जबकि 8 नई धाराएं जोड़ी गई हैं और 22 धाराएं निरस्त/हटाई गई हैं। भारतीय
साक्ष्य अधिनियम में मूल 167 सेक्शन की जगहों 170 सेक्शन होंगे। इसमें कुल 23 धाराएं संशोधित की गई हैं, एक नई जोड़ी गई है और 5 धाराएं निरस्त/हटाई गई हैं। कानून में एक नया अपराध
शामिल किया गया है, जिसमें असल पहचान
छिपाकर किसी महिला से शादी करने या विवाह, पदोन्नति और रोजगार के झूठे वादे
की आड़ में यौन संबंध बनाने पर 10 साल तक की कैद हो सकती है। सरकार ने गैंगरेप के सभी मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास का
प्रावधान भी पेश किया है। वहीं 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप के मामले में आजीवन कारावास
या मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित
करने के लिए सरकार शून्य प्राथमिकी की प्रणाली ला रही है, जिसके तहत देश में कहीं भी अपराध
हो, उसकी प्राथमिकी हिमालय की
चोटी से लेकर कन्याकुमारी के सागर तक कहीं से भी दर्ज कराई जा सकती है।
इसके साथ ही ई-प्राथमिकी (E-FIR) की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके लिए अब राज्य सरकार हर जिले और हर थाने में एक पुलिस अधिकारी नामित करेगी जो किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी की उसके परिवार को सूचना देगा। पुलिस अधिकारी पीड़ित को डिजिटल माध्यमों सहित 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के बारे में सूचित करेंगे। नस्ल, जाति, समुदाय आदि के आधार पर हत्या से संबंधित अपराधों के लिए एक नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिसके लिए कम से कम सात साल की कैद, उम्र कैद या सजा ए मौत का प्रावधान किया गया है। स्नैचिंग के लिए नए प्रावधान के अनुसार, गंभीर चोट के कारण लगभग अक्षमता या स्थायी विकलांगता होने पर ज्यादा कड़ी सजा दी जाएगी।
बच्चों द्वारा अपराध करवाने वालों के लिए न्यूनतम सात से 10 साल की कैद का भी प्रावधान है। यह जुर्माना पहले बहुत कम था, 10 रुपये से 500 रुपये के बीच नए कोड में अब विभिन्न अपराधों के लिए जुर्माना और सजा
को तर्कसंगत बनाया गया है। यौन हिंसा के मामले में पीड़िता का बयान महिला न्यायिक
मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा। पीड़िता का बयान उसके आवास पर एक महिला पुलिस
अधिकारी की उपस्थिति में दर्ज करना भी वांछनीय होगा। ऐसा बयान दर्ज करते समय
पीड़ित के माता-पिता या अभिभावक मौजूद रह सकते हैं।
इसके अलावा 7 साल या अधिक जेल की सजा वाले अपराध
के मामले में पीड़ित का पक्ष सुने बिना कोई सरकार मामले को वापस नहीं ले सकेगी। अपराध
की आय से बनाई गई संपत्ति की कुर्की और जब्ती के संबंध में एक नई धारा जोड़ी गई है। जांच करने वाला पुलिस अधिकारी यह संज्ञान लेने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है
कि संपत्ति आपराधिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप प्राप्त की गई है,अगर संपत्ति रखने
वाला व्यक्ति इसके संबंध में ठोस स्पष्टीकरण देने में विफल रहता है,तो इस तरह की
संपत्ति को न्यायालय द्वारा जब्त किया जा सकता है। सरकार द्वारा पेश किए गए विधेयक
के अनुसार, पहली बार अपराध करने वालों
को जल्दी रिहा किया जा सकता है। एक व्यक्ति जो पहली बार अपराधी है और कारावास का
एक तिहाई हिस्सा काट चुका है, उसे अदालत द्वारा जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा।
जहां विचाराधीन कैदी
ने आधी या एक तिहाई सजा पूरी कर ली है, जेल अधीक्षक को तुरंत अदालत में लिखित रूप में एक आवेदन
देना होगा। हालांकि आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा पाए किसी विचाराधीन कैदी की
माफी पर विचार नहीं किया जाएगा। भगोड़े आरोपियों की अनुपस्थिति में उन पर मुकदमा
चलाने का नया प्रावधान शामिल किया गया है। इसका मतलब हुआ कि लोगों का पैसा हड़पने
के बाद विदेश भाग गए लोगों सहित फरार आरोपियों को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और
उन्हें दंडित किया जाएगा, भले ही उन्होंने जांच या न्याय प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर
दिया हो।
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