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- एकनाथ शिंदे की शिवसेना बिगाड़ सकती है राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस का चुनावी खेल...
Posted by : achhiduniya
18 September 2023
लाल डायरी दिखाकर रातों रात सियासत के फलक पर
चर्चा में आने वाले राजस्थान गहलोत सरकार से बर्खास्त पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने झुंझुनूं में पार्टी की सदस्यता दिलाई और उन्हें एकनाथ
शिंदे की शिवसेना में कोऑर्डिनेटर पद की जिम्मेदारी दी गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र
से बाहर अन्य राज्यों में भी अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं
राजस्थान में शिवसेना की एंट्री के साथ ही गहलोत सरकार से बर्खास्त मंत्री
राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने पार्टी का दामन थाम लिया। अशोक गहलोत के करीबी रहे गुढ़ा
ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। गुढ़ा ने हाल ही में दावा
भी किया था कि अगर मेरा आशीर्वाद नहीं होता तो गहलोत कभी मुख्यमंत्री नहीं बनते। 24 जुलाई को विधानसभा में
लाल डायरी दिखाने के आरोप में
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| [पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा] |
गुढ़ा के शिवसेना में
शामिल होने पर आयोजित किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी एकनाथ शिंदे और गुढ़ा ने
राजस्थान में शिवसेना की भूमिका पर कुछ नहीं कहा,हालांकि शिंदे ने प्रेस
कॉन्फ्रेंस में ये जरूर कहा कि उनकी पार्टी जनता के लिए काम करती है अगर पार्टी
सत्ता में आती है तो राज्य के विकास पर काम करेगी, युवाओं को नौकरी देने और क्षेत्र में उद्योग, महिलाओं की सुरक्षा, मजबूत कानून-व्यवस्था और
किसानों की प्रगति को ध्यान में रखते हुए काम करेगी। राजेंद्र गुढ़ा के शिवसेना
में शामिल होने के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा राजेंद्र गुढ़ा राज्य की जनता के लिए आवाज उठा रहे थे। इसमें
उनकी गलती थी? उन्होंने कहा कि
गुढ़ा ने मंत्री का पद छोड़ दिया, लेकिन सच्चाई नहीं छोड़ी।
शिंदे ने इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेंद्र
गुढ़ा की तारीफ करते हुए कहा, देश को आप जैसे सच्चे नेता की जरूरत है, जो अपने स्वार्थ को परे रख कर जनता का फायदा देखते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे आपने मंत्री पद छोड़ दिया था, ठीक इसी तरह एक साल पहले
मैंने और मेरे साथ 9 मंत्रियों ने मंत्री पद छोड़ दिया था, ये हमने सच्चाई के लिए और बाला साहेब के विचारों के लिए सत्ता का त्याग
किया था। एकनाथ शिंदे पार्टी की इसी परंपरा को तोड़ने के लिए अन्य राज्यों में भी
अपनी पैठ बनाना चाहते है। यही कारण है कि पार्टी ने राजस्थान से अपने विस्तार की
शुरुआत कर दी है। राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले है
जिसे लेकर प्रदेश की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। प्रदेश की राजनीति
के लिहाज से सितंबर का महीना बेहद ही खास है। इस महीने की शुरुआत में ही राजस्थान
में बीजेपी और कांग्रेस को चुनावी मैदान में टक्कर देने के लिए एक और बड़ी पार्टी
यानी शिवसेना की एंट्री हुई।
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