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- शनि की साढ़ेसाती व पीड़ा से मुक्ति दिलाती शनि अमावस्या पर भक्तिभाव से की गई युक्ति.....
Posted by : achhiduniya
14 October 2023
शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है, क्योंकि वे लोगों को
उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। इसीलिए धर्मशास्त्रों में शनि अमावस्या के दिन
का विशेष महत्व बताया गया है। आज के दिन भक्त शनिदेव को ख़ुश करने के लिए व्रत और
नियमों का पालन करते हैं,जिसकी कुंडली में शनि दोष होता है वे शनि देव की
पूजा-अर्चना करके अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करते हैं। शास्त्रों की मानें
तो सूर्यपुत्र शनिदेव यमराज के भ्राता और भद्रा के भाई हैं। शनि अमावस्या पर नवग्रह मंदिर में जाकर शनिदेव की
पूजा अर्चना
करनी चाहिए। पूजा करने के बाद शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि का पाठ करना
चाहिए। शनि मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं। शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की
पूजा करना शुभ माना जाता है। इस उपाय को करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन
सुबह पीपल की जड़ में दूध और जल अर्पित करना चाहिए।
इसके बाद 5 पीपल के पत्तों को लेकर
उसमें मिठाई रखकर घी का दीपक जलाना चाहिए और साथ ही 7 बार परिक्रमा करना चाहिए,कहा
जाता है कि इस दिन पीपल का पेड़ लगाना भी बेहद शुभ होता है ऐसा करने से आपकी सोई
हुई क़िस्मत जाग जाएगी। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिश्चरी अमावस्या पर
नारियल अर्पित
करना चाहिए। कई बार लोगों को बहुत मेहनत करने के बाद भी इसका फल नहीं मिलता है, ऐसे लोगों की कुंडली में
शनि दोष माना जाता है। शनिश्चरी अमावस्या के दिन नारियल अर्पित करने से भी शनि दोष दूर होता है। शनिदेव को काला रंग
बहुत पसंद है इसलिए शनि देव को काले तिल का तेल अर्पित करना चाहिए।
ऐसा करने से
जीवन में उन्नति होती है और साथ ही शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है।
इससे जीवन में
समृद्धि आती है,लेकिन इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि उस दिन अपने पास किसी को भी न
सुलाए। इसके बाद शनिवार को शनि मंदिर में उस पोटली को रख दें और शाम के समय काले
सुरमे की शीशी को सिर से लेकर पैर तक नौ बार किसी से उतरवा लें और फिर उसको किसी
जगह पर ले जाकर ज़मीन में दबा दें। ऐसा करने से शनि साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव कम
होता है।
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