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- शुभ कार्य से पहले कहीं बाबा तो कहीं दामाद के रूप में आज भी पूजे जाते है रावण....
Posted by : achhiduniya
18 October 2023
मध्य प्रदेश के रावन गांव में रावण की विशालकाय प्रतिमा है। इस मंदिर में
रावण की लेटी हुई प्रतिमा है। बताया जाता है कि ये परमार कालीन मंदिर है, जिसमें रावण की लेटी हुई अवस्था में सालों पुरानी विशाल प्रतिमा है। इस
मंदिर में रावण की आरती भी लिखी हुई है। इस गांव के लोग दशहरे को उत्सव के रूप में
मनाते हैं और रावण को पूजा जाता है। इस गांव में ये परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
रावन नामक गांव प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 90 किलोमीटर दूर विदिशा जिले की नटेरन तहसील में स्थित है। इस गांव के रावण बाबा का मंदिर है। इस गांव में किसी के घर में शादी हो या कोई नए काम की शुरुआत, यहां सबसे पहले रावण बाबा की पूजा
होती है। यह प्रथा यहां कई वर्षों से चली
आ रही है। विदिशा के अलावा मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी दशहरे पर रावण का वध न
करते हुए उसकी पूजा की जाती है। यहां का नामदेव समाज रावण को दामाद मानता है और
विजयादशमी के दिन शहर के खानपुरा में सीमेंट से बनी रावण की 42 फिट की प्रतिमा की पूजा करता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी
नामदेव समाज की बेटी थी और वो मंदसौर की ही रहने वाली थी।
जिसके चलते रावण को
मंदसौर का दामाद का दर्जा दिया गया है। यहां समाज के लोग रावण के दाहिने पैर में
लच्छा बांधकर रावण की पूजा करते हैं। मध्य प्रदेश के मालवा में भी रावण को दमाद
मानते हैं और यहां दामाद को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए यहां की हर महिला रावण के सामने घूंघट कर गुजरती है। इसके अलावा एक
विशेष प्रकार का बुखार आने पर रावण के दाहिने पैर में लच्छा बांधने से वह बुखार भी
ठीक हो जाता है। इसके अलावा मनोकामना पूरी होने पर रावण को तरह तरह के भोग भी लगाए
जाते है।
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