- Back to Home »
- International News »
- उथल-पुथल से जूझ रही दुनिया को हिंदू मूल्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए तभी विश्व में शांति की स्थापना हो सकेगी थाईलैंड प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिनी
उथल-पुथल से जूझ रही दुनिया को हिंदू मूल्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए तभी विश्व में शांति की स्थापना हो सकेगी थाईलैंड प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिनी
Posted by : achhiduniya
24 November 2023
समाचार एजेंसी एएनआई
के मुताबबिक थाईलैंड प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदू धर्म के सिद्धांतों और मूल्यों
पर आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस की मेजबानी करना हमारे देश के लिए सम्मान की बात
है। थाई पीएम ने आशा जताई कि उथल-पुथल से जूझ रही दुनिया को अहिंसा, सत्य, सहिष्णुता और
सद्भाव के हिंदू मूल्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए तभी विश्व में शांति की स्थापना हो
सकेगी। विश्व में हिन्दुओं की एक
प्रगतिशील और प्रतिभासंपन्न समाज के रूप में
पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से ही इस भव्य सम्मेलन का शुभारंभ हुआ है। थाईलैंड
में आयोजित वर्ल्ड
हिन्दू कांग्रेस सम्मेलन में दुनियाभर के 61 देशों से आमंत्रित 2,200 से ज्यादा प्रतिनिधि एकत्र हुए हैं। यह सभी शिक्षा, अर्थतंत्र, अकेडेमिक, रिसर्च एंड डेवल्पमेंट, मीडिया और राजनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने
वाले हैं। इनमें से करीब 25 देशों के
सांसद एवं मंत्री भी शामिल हैं। थाईलैंड में भारतीय समुदाय के करीब 10 लाख लोग रहते हैं जिनका देश के व्यापार और आर्थिक विकास में बड़ा
योगदान है।
हालांकि पीएम के सम्मेलन में नहीं पहुंचने की वजह से लोगों में कुछ निराशा भी देखी गई। इस कार्यक्रम के उद्घाटन
सेशन के दौरान मेजबान देश के पीएम श्रेथा थाविसिनी को भी शिरकत करनी थी,लेकिन किन्ही वजह से वह शामिल नहीं हो सके। सभा में थाई प्रधानमंत्री
की तरफ से भेजे मैसेज को पढ़ा गया। उन्होंने कहा कि थाईलैंड की भारत से भौगोलिक
दूरी जो भी हो,लेकिन हिन्दू धर्म के सत्य और सहिष्णुता के सिद्धांतों का हमेशा से
आदर रहा है। उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से यह भी आशा जताई कि अशांति से जूझ रहे विश्व में हिंदू जीवन मूल्यों से
प्रेरणा लेकर शांति स्थापित हो सकती है। धर्म की विजय के उद्घोष के साथ प्रख्यात संत माता अमृतानंदमयी, भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी पूर्णात्मानंद, आरएसएस के सरसंघचालक मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, विहिप के महामंत्री
मिलिंद परांडे और कार्यक्रम के संस्थापक-सूत्रधार स्वामी विज्ञानानंद ने दीप
प्रज्ज्वलित कर प्रारंभ किया।


