- Back to Home »
- Judiciaries »
- बीजेपी के गवर्नरों को सुप्रीम कोर्ट क्यू लगा रहा फटकार....?
Posted by : achhiduniya
14 November 2023
वर्तमान में तमिलनाडु,
केरल,
पंजाब,
बंगाल
और तेलंगाना के राज्यपाल का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सभी राज्यों की सरकार ने
अपने राज्यपालों के मनमानी की शिकायत की है। राज्यों का कहना है कि राज्यपाल संविधान
के तहत काम नहीं करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर
के बाद राज्यपाल की भूमिका पर बड़े पैमाने पर सुनवाई करने की बात कही है। हालांकि,
सवाल
यह उठ रहा है कि आखिर बार-बार राज्यपाल का विवाद सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंच रहा है।
देश में अभी 14 राज्यों में उन पार्टियों की
सरकार है, जो केंद्र की सत्ता में
शामिल नहीं है। इंडिया गठबंधन की 11 राज्यों
में सरकार है। यूपीए सरकार के वक्त बमुश्किल 4-5 राज्यों
में ही विपक्षी पार्टियों की सरकार थी। सियासी जानकार इसे टकराहट की मुख्य वजह
मानते हैं। जानकारों का कहना है कि संविधान में सबकी शक्ति के बारे में
बता दिया
गया है। राज्यपाल अगर अपने संवैधानिक मर्यादा में रहेंगे,
तो
कभी विवाद होगा ही नहीं। पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित पर हाल ही में
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की,पुरोहित और पंजाब सरकार के बीच करीब एक साल से
सियासी द्वंद जारी है। कोर्ट ने कहा था कि जब मेरे पास मामला आता है,
तभी
राज्यपाल कार्रवाई क्यों करते हैं? आप आग
से खेल रहे हैं, आपको अंदेशा है। सुप्रीम
कोर्ट की टिप्पणी ने पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित के कामकाज को कठघरे में
खड़ा कर दिया है। 2016 में
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के तत्कालीन राज्यपाल केके पॉल को जमकर फटकार लगाई थी।
राज्यपाल ने विशेष शक्ति का उपयोग करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी। उस वक्त राज्य में हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि राज्यपाल केंद्र के एजेंट नहीं हैं। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कुछ विशेष मामलों में ही किया जाना चाहिए। 2016 में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने राजखोवा के उन सभी फैसले को पलट दिया था, जिसमें कांग्रेस सरकार को बहुमत होते हुए भी अपदस्थ कर दिया गया था। राज्यपाल जेपी राजखोवा ने पहले राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी और फिर कांग्रेस के ही एक बागी को मुख्यमंत्री बना दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने राज्यपाल की
भूमिका पर सवाल उठाया और कहा-राज्यपाल को राजनीतिक खरीद-फरोख्त और अप्रिय राजनीतिक
जोड़-तोड़ से दूर रहना चाहिए। महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे भगत सिंह कोश्यारी भी
सुप्रीम कोर्ट के फायरिंग रेंज में आ चुके हैं। 2023 के
फरवरी में सुनाए एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल को राजनीतिक
मामलों और सरकार के गठन में दखल नहीं देना चाहिए। जून2022
में
शिवसेना विवाद में कोर्ट ने कोश्यारी की भूमिका को संदिग्ध माना और कहा कि फ्लोर
टेस्ट का जो फैसला उन्होंने दिया, वो गलत
था। सर्वोच्च न्यायलय की संवैधानिक बेंच ने कहा-फ्लोर टेस्ट बुलाने के लिए
राज्यपाल के पास कोई पुख्ता आधार नहीं था। राज्यपाल ने बागी गुट की सुरक्षा की मांग
को सरकार का अल्पमत मान लिया।




