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- शिव का नंदी,गणेश का चूहा तो माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू ही क्यू....?
Posted by : achhiduniya
07 November 2023
हिंदू धर्म में हर देवी-देवता का वाहन किसी न
किसी पशु-पक्षी या प्राणी से होता है जैसे:-शिवजी का नंदी,गणेश का चूहा,माता
वैष्णो देवी का सिंह या शेर,कार्तिके का मोर,शनि देव का कौआ,सूर्य देव का दौड़ते
घोड़े वाहन के रूप में दिखाई देते है वैसे ही कभी आपने सोचा है माता लक्ष्मी का
वाहन उल्लू ही क्यू....? हंस-बदक या कोयल क्यू नहीं वह तो धन की देवी है। मां लक्ष्मी धन-दौलत की देवी
हैं। जिस पर इनकी कृपा हो जाए, उसके पास रुपये-पैसे, ऐश्वर्य, समृद्धि
की कमी नहीं रहती है। मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू होता है लेकिन क्या आप जानते हैं
कि माता लक्ष्मी में उल्लू को ही अपने वाहन के रूप में क्यों चुना। दिवाली पर
मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है
कि इस दिन अगर आपको उल्लू के दर्शन हो
जाएं, तो
आपका भाग्य खुल जाता है क्योंकि उल्लू आर्थिक समृद्धि का सचूक होता है। कार्तिक
अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है। त्योहार के रात्रिकाल में माता लक्ष्मी
धरती पर विचरण करती हैं। एक बार देवी लक्ष्मी ने सभी पशु-पक्षियों से कहा कि वह
कार्तिक अमावस्या पर धरती पर आएंगी और अपने वाहन का चुनाव करेंगी। उस समय जो भी
पशु-पक्षी मुझ तक सबसे पहले पहुंचेगा, मैं उसे अपना वाहन बना लूंगी।
कार्तिक अमावस्या पर सभी पशु-पक्षी आंखें बिछाए लक्ष्मी जी की राह देखने लगे। अमावस्या
की काली रात में देवी लक्ष्मी जब धरती पर पधारीं, तभी उल्लू ने काले अंधेरे में
भी अपनी तेज नजरों से उन्हें
देख लिया और तीव्र गति से उनके समीप पहुंच गया। जिसके बाद लक्ष्मी जी ने उल्लू को अपना वाहन
स्वीकार किया। मां लक्ष्मी को तभी से उलूक वाहिनी भी कहा जाता है। गौरतलब है कि भारतीय संस्कृति में उल्लू को लेकर कई
मान्यताएं हैं। माता लक्ष्मी की सवारी उल्लू को शुभता और धन संपत्ति का प्रतीक
माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, उल्लू सबसे बुद्धिमान निशाचर पक्षी होता है।


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