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- नवजात शिशुओ को पालने में डालकर नदी में छोड़ देते है, पम्परा या अंध विश्वास...
Posted by : achhiduniya
29 November 2023
मध्य
प्रदेश के बैतूल भैंसदेही की पूर्णा नदी पर कार्तिक पूर्णिमा से 15 दिनों का मेला लगा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि
जिन दंपतियों की संतान नहीं है। वे यहां आकर मन्नत मांगते हैं। संतान होने के बाद नदी की बहती धारा में बच्चे
को छोड़ इस अनूठी परम्परा को निभाते हैं। पूर्णा नदी के किनारे लगने वाले इस मेले में
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी भक्त पहुंचते हैं। संतान की
मनोकामना के
लिए यह भगत और भुमका स्थानीय पुजारियों के
साथ अपनी अर्जी लगा कर चले जाते है। जब भी संतान हो जाती है, तब भक्त आकर पहले पूजा अर्चना करते हैं। इसके
बाद भगत स्थानीय पुजारी इन बच्चों को मां पूर्णा के आंचल में लकड़ी के पालने
में डालकर कुछ देर बहती नदी में छोड़ देते हैं। ग्रामीणों की मानें तो यह परंपरा काफी साल
पुरानी है। कार्तिक पूर्णिमा और उसके बाद के दो दिनों में 500 अधिक बच्चों को पूर्णा नदी में छोड़ा जाता है, लेकिन आज तक कोई दुर्घटना नहीं हुई है।
मध्य
प्रदेश के अलावा छतीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश तक के श्रद्धालु यहां आते हैं। पूर्णा माई उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।
यह परम्परा मध्य प्रदेश के बैतूल की पूर्णा माई मंदिर में हर साल होती है।
मंदिर के पंडित हरिराम दडोरे की मानें तो हर साल लगभग 1000 बच्चों को यहां पालने में छोड़ा जाता है।


