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- पति ही क्यू न करे रेप रेप ही होता है... गुजरात हाईकोर्टने की सख्त टिप्पणी
Posted by : achhiduniya
21 December 2023
भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर कायम चुप्पी को तोड़ने की जरूरत है,
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि रेप आखिर
रेप होता है, भले ही यह किसी पुरुष की ओर से अपनी पत्नी के
साथ ही क्यों न किया गया हो। हाल में में दिए गए एक आदेश में
जस्टिस
दिव्येश जोशी ने कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वास्तविक घटनाएं सामने
आने वाले आंकड़ों से संभवत: कहीं अधिक हैं। आदेश में कहा गया कि पीछा करने,
छेड़छाड़,
मौखिक
और शारीरिक हमले जैसी कुछ चीजों को समाज में आम तौर पर मामूली
अपराध
के रूप में चित्रित किया जाता है और साथ ही सिनेमा जैसे लोकप्रिय माध्यमों में इसे
प्रचारित भी किया जाता है। इसमें कहा गया
कि जहां यौन अपराधों को लड़के तो लड़के
ही रहेंगे के चश्मे से देखा जाता है और अपराध को
नजरअंदाज किया जाता है,उसका पीड़ित लोगों पर
एक स्थायी और हानिकारक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने बहू के साथ क्रूरता और आपराधिक
धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार एक महिला की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए
ये टिप्पणियां कीं,आरोप है कि महिला के पति और बेटे ने बहू के साथ रेप किया और
पैसे कमाने के लालच में अश्लील साइट पर पोस्ट करने के लिए निर्वस्त्र अवस्था में
उसके वीडियो बनाए।
कोर्ट ने कहा,ज्यादातर (महिला पर
हमला या रेप) मामलों में, सामान्य प्रथा यह है कि
यदि पुरुष पति है,लेकिन वह पर पुरुष के
समान आचरण करता है, तो उसे छूट दी जाती है।
मेरे विचार में, इस चीज को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एक
पुरुष आखिर एक पुरुष है। एक कृत्य आखिर एक कृत्य
है। रेप आखिर रेप है,
चाहे
यह महिला, यानि के पत्नी के साथ किसी पुरुष,
यानि
के पति की ओर से किया गया हो। आदेश में कहा गया कि
संविधान महिलाओं को पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा देता और विवाह को समान लोगों
का एक गठबंधन मानता है। अदालत ने कहा, भारत में,
अपराधी
अकसर महिला को जानते हैं। ऐसे अपराधों को उजागर
करने से सामाजिक और आर्थिक दिक्कतों का भय रहता है। परिवार पर सामान्य आर्थिक
निर्भरता और सामाजिक बहिष्कार का डर महिलाओं को किसी भी प्रकार की यौन हिंसा,दुर्व्यवहार
या घृणित व्यवहार की जानकारी देने से रोकता है।
आदेश में कहा गया कि इसलिए,
भारत
में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वास्तविक घटनाएं सामने आने वाले आंकड़ों से संभवत:
कहीं अधिक हैं। इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धाराओं-
354
(ए)
(अवांछनीय और स्पष्ट यौन उत्पीड़न, यौन संबंध की मांग,
महिला
की इच्छा के विपरीत अश्लील सामग्री दिखाना),
376 (रेप), 376 (डी) (सामूहिक रेप),
498 (पति या पति के रिश्तेदार की ओर से महिला के साथ क्रूरता),
506 (आपराधिक धमकी), 508 (किसी व्यक्ति को यह
विश्वास कराना कि यदि वह कोई विशेष कार्य नहीं करता है,तो उसे भगवान की ओर से
दंडित किया जाएगा) और 509 (यौन उत्पीड़न) के तहत
मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के बेटे ने अपने
मोबाइल फोन पर अपनी पत्नी के और अपने (पति-पत्नी) अंतरंग क्षणों के नग्न वीडियो
बनाए और उन्हें अपने पिता को भेज दिया। इस बारे में लड़के की मां को पूरी जानकारी
थी क्योंकि कृत्य उसी की मौजूदगी में किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार,
परिवार
को अपने व्यावसायिक साझेदारों की ओर से अपने होटल की बिक्री को रोकने के लिए धन की
आवश्यकता थी। जब पीड़िता अकेली थी तो उसके ससुर ने भी उसके साथ छेड़छाड़ की। अदालत
ने कहा कि सास को गैरकानूनी और शर्मनाक कृत्य के बारे में पता था और उसने अपने पति
और बेटे को ऐसा कृत्य करने से न रोककर अपराध में बराबर की भूमिका निभाई।
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