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- 7 चरणों में मतदान का देश पर क्या होगा असर राजनैतिक पार्टियों ने बताई वजह...
Posted by : achhiduniya
17 March 2024
विपक्षी पार्टियों ने इस बार
भी वही सवाल उठा रहा है, जो आज से 5 साल पहले या उससे पहले उठाया करता था। क्योंकि इस
चुनाव की तारीखें भले ही अलग हों, लेकिन वोटिंग 7 चरणों में ही हो रही है। इस बार चुनाव 7 चरणों में हो रहा है। 2019 में भी सात चरणों में ही लोकसभा चुनाव के लिए
वोटिंग हुई थी। वहीं 2014 के चुनाव में नौ
चरणों में वोटिंग हुई थी। 2009 में छह
फेज और 2004 में चार चरणों में लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग
हुई थी। इस बार के चुनाव में दिल्ली समेत कुल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक ही फेज
में मतदान होगा। वहीं कर्नाटक, राजस्थान, त्रिपुरा और मणिपुर में 2 चरणों में चुनाव होंगे। कांग्रेस
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, सात
चरणों का मतलब है कि लगभग सभी विकास कार्य
रुक जाएंगे और लगभग 70-80 दिनों तक रुकने का
मतलब है कि आप कल्पना कर सकते हैं कि देश कैसे प्रगति करेगा क्योंकि चुनाव आचार
संहिता के अनुसार, लोग नहीं चलेंगे, सामग्री की आपूर्ति नहीं की जाएगी, बजट खर्च नहीं होगा, इसलिए मेरे हिसाब से ये ठीक नहीं है। चुनाव तीन
या चार फेज के भीतर पूरे हो सकते थे। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, देश में लोकसभा आमचुनाव 2024 के लिए तिथि की घोषणा का स्वागत है। यदि यह चुनाव
कम समय में करीब तीन या चार चरणों में होता तो ज्यादा बेहतर होता।
इससे समय और
संसाधन दोनों की बचत के साथ ही चुनावी खर्च कम करना संभव होता। चुनावी माहौल भी
लगातार तनावपूर्ण, जातिवादी और
सांप्रदायिक बने रहने सहित और भी समस्यायें इससे दूर होतीं।19 अप्रैल को पहले फेज की वोटिंग होगी और 7 चरण की वोटिंग के बाद 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इस दौरान
यूपी, बिहार और बंगाल में सबसे ज्यादा 7 चरणों में वोटिंग होना है। पहले चरण की वोटिंग से
लेकर काउंटिंग तक यानी 46 दिनों
की लंबी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं।
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