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शिक्षित युवाओं में ज्यादा है बेरोजगारी बेहद गंभीर होते मामले पर इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाईजेशन ने जताई चिंता....
Posted by : achhiduniya
29 March 2024
इंडिया एम्पलॉयमेंट रिपोर्ट
2024 के नाम से इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाईजेशन (ILO) ने इंस्टीच्युट ऑफ ह्यूमन
डेवलपमेंट (IHD) के साथ मिलकर देश के युवाओं
में रोजगार के हालात को लेकर एक डेटा जारी किया है जिसमें बताया गया है कि देश में
83 फीसदी युवा वर्कफोर्स बेरोजगार है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि कुल बेरोजगार
युवाओं में सेकेंडरी या हायर सेकेंडरी शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं की संख्या जो
2000 में 35.2 फीसदी थी वो 2022 में करीब दोगुनी बढ़कर 65.7
फीसदी हो गई है। आईएलओ ने
भारत में बेरोजगारी के इस हालात को बेहद गंभीर करार दिया है। आईएलओ ने अपनी
रिपोर्ट जारी की है उसमें कहा गया, बेहतर क्वालिटी वाले
रोजगार
के अवसर में कमी के चलते ऐसे युवाओं में बेरोजगारी दर बेहद ज्यादा है,जिन्होंने उच्च शिक्षा
हासिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवा कम वेतन
वाले उपलब्ध रोजगार, या फिर असुरक्षित रोजगार में जाने को कतई तैयार
नहीं हैं जो अभी उपलब्ध है। बल्कि वे बेहतर अवसर आने तक रोजगार पाने के लिए रुकने
को तैयार हैं। स्टडी में बताया गया कि कोरोना महामारी के दौरान शिक्षित युवाओं में
रोजगार की कमी सबसे ज्यादा देखने को मिली है।
इसके अलावा डॉब मार्केट में शामिल
वर्कफोर्स का वेतन या तो स्थिर रहा है या फिर कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019
के बाद से रेग्यूलर वर्कर
या फिर सेल्फ एम्पलॉयड युवाओं का वास्तविक वेतन कम हुआ है। इंटरनेशनल लेबर
ऑर्गनाईजेशन ने महिला लेबर वर्कफोर्स की कम होती भागीदारी को लेकर अपनी रिपोर्ट
में चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे देश के लेबर मार्केट में लिंग-अनुपात यानि पुरुषों के
मुकाबले महिला वर्कफोर्स की कमी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा महिलाओं के बीच बेरोजगारी की
चुनौती सबसे भयावह है खासतौर से ऐसी महिलाओं के बीच जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल
की हुई है।
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के इस रिपोर्ट को भारत सरकार के मुख्य
आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरण ने खुद जारी किया था। रिपोर्ट जारी करते हुए
उन्होंने कहा कि ये सोचना बेहद गलत है कि सरकार के हस्तक्षेप से देश में सभी
सामाजिक और आर्थिक समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी जैसी
समस्या को दूर करने की बातें करना, इसका निराकरण करने से
ज्यादा आसान है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर पूरे संसार में कमर्शियल सेक्टर
को रोजगार का सृजण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार के अवसर को बढ़ाने
के लिए कई फैसले लिए हैं,जिसमें कौशल विकास से लेकर
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 शामिल है। हालांकि मुख्य
आर्थिक सलाहकार के इस बयान के बाद विपक्ष सरकार पर निशाना भी साध रही है। विपक्ष
का आरोप है कि सरकार रोजगार देने से अपना पल्ला झाड़ रही है।




