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- शरिया और हदीस चार शादी करने के वक्त ही क्यों याद आता है...? अमित शाह ने पूछा सवाल...
Posted by : achhiduniya
20 March 2024
केन्द्रीय गृहमंत्री
अमित शाह ने कहा कि जब भी कोई मुस्लिम देश की किसी भी अदालत में कोई वाद दायर करता
है तो हमारे संविधान और कानून के मुताबित ही सिविल सूट होता है,
ना कि शरिया या हदीस के हिसाब से। उन्होंने
कहा कि देश में समान नागरिकता की बात बीजेपी का एजेंडा नहीं है,
बल्कि हमारे संविधान निर्माताओं ने यह बात
कही है। CNN NEWS 18 के राइजिंग भारत के मंच पर गृह मंत्री अमित शाह
ने कहा कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या बौद्ध सभी को एक कानून के साथ जीना चाहिए।
धार्मिक
स्वतंत्रता में कोई दखल नहीं होना चाहिए। परंतु कानून एक होना चाहिए। उन्होंने
कहा कि हमने समान नागरिक संहिता- यूसीसी को मूलभूत सिद्धांतों में स्वीकार किया था।
संविधान बनाने वाले सभी कांग्रेसी नेता थे और उन्होंने स्वीकार किया कि उचित समय
पर देश के विधानमंडल और संसद इस देश के अंदर यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर आएगी। यह एक
आदर्श हमारे सामने उन्होंने रखा था। अमित शाह ने कहा कि शरिया और हदीस के हिसाब से
तो चोरी करने वालों के हाथ काट देने चाहिए, बलात्कार करने वालों को सड़क पर पत्थर मारकर मार
देना चाहिए,
कोई मुसलमान बचत खाता नहीं खोल सकता है, ब्याज नहीं ले सकता है, लोन नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि शरिया और हदीस से जीना है तो पूरी तरह से जीना चाहिए। सिर्फ चार शादी के करने के लिए शरिया और हदीस क्यों आता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। समान नागरिकता संहिता (UCC) पर विपक्षी दलों के विरोध और इस मुस्लिम पर्सनल लॉ या सरिया के खिलाफ बताए जाने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखे सवाल पूछे,उन्होंने कहा है कि सिर्फ चार शादी करने के वक्त ही शरिया और हदीस क्यों याद आता है? इस देश का मुसलमान शरिया और हदीस की सारी चीजों से अंग्रेजों के जमाने से कटा हुआ है और कई इस्लामिक देश भी इसे छोड़ चुके हैं।
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